तीन महीने से वेतन नहीं, विरोध के बाद बांटने लगे तो 1200 रुपये कम देने की कोशिश, सामूहिक हड़ताल पर गए सफाई कर्मचारी
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
चेकिंग में बार-बार गड़बड़ी पकड़े जाने, वाहन और कर्मचारी कम पाने के बावजूद निगम के अधिकारियों द्वारा ठेकेदारों के प्रति रहमदिली ठेके पर लगे सफाई कर्मचारियों पर भारी पड़ रही है। एक तो तीन महीने तक वेतन नहीं मिला, देने लगे तो वो भी नियमों के खिलाफ 1200 रुपये काटकर। जेब पर डाका पड़ते देख सफाई कर्मचारियों ने सामूहिक हड़ताल करने की घोषणा कर दी। उधर, स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर अव्वल आने के सपने संजो रहे अधिकारियों की नींद टूटी और आनन-फानन में दौड़कर कर्मचारियों के पास पहुंचे। कर्मचारियों ने जब अधिकारियों से अपना वेतन पूछा तो अधिकारी बंगले झांकने लगे। आखिर सफाई कर्मचारियों से खरी-खरी सुनने के बाद अधिकारी वापस हो गए। दोपहर बाद मिले आश्वासन पर ही सफाई कर्मचारी काम पर गए। कर्मचारियों ने चेताया है कि अगर उनके साथ अन्याय किया गया तो वे चुप नहीं बैठेंगे और पैसे पूरे लेंगे।
यह है मामला
जानकारी अनुसार ताऊ देवीलाल पार्क के पास स्थित नगर निगम के वाहन स्टेशन पर सुबह जोन नंबर 1 और 2 के कर्मचारी एकत्र हुए और काम पर जाने से इंकार कर दिया। कर्मचारियों ने बताया कि ठेकेदार उन्हें 9200 रुपये प्रति महीना के हिसाब से चेक देने की कोशिश कर रहा है, लेकिन वे पूरे पैसे लेंगे। कर्मचारियों ने एक सूर में सामूहिक हड़ताल कर दी। हड़ताल की सूचना मिलते ही निगम अधिकारियों के पसीने छूट गए और वे आनन फानन में मौके पर पहुंचे। डीएमसी रोहताश बिश्नोई, ईओ धीरज कुमार, सीनियर सेनेटरी इंस्पेक्टर महाबीर सोढ़ी और इंस्पेक्टर सुरेंद्र चोपड़ा ने कर्मचारियों से बात की, लेकिन कर्मचारियों ने अधिकारियों की कोई बात नहीं सुनी।
इस दौरान कर्मचारियों ने अधिकारियों व ठेकेदारों दोनों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और सभी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। कर्मचारी चरणजीत, सुरेश, रामफुल आदि ने बताया कि उनका डीसी रेट 12100 रुपये है, लेकिन ठेकेदार 9200 रुपये थमा रहा है, जो सरासर लूट है। वे इसे कतई सहन नहीं करेंगे। इसी प्रकार रामकेश ने बताया कि उनके बच्चों की स्कूलों की फीस तक नहीं भर पाये हैं, पिछले तीन महीने से उन्हें वेतन नहीं मिल रहा है, जबकि निगम की ओर से ठेकेदारों के पास पैसा जा चुका है। कर्मचारियों ने यह भी कहा कि जो कर्मचारी ठेकेदार के खिलाफ आवाज उठाता है उसे नौकरी से निकाल दिया जाता है। डीएमसी और ईओ ने ठोस आश्वासन दिया कि किसी के साथ ज्यादती नहीं होने दी जाएगी और सभी को पूरा वेतन दिलाया जाएगा, इसके बाद करीब एक बजे कर्मचारी काम पर लौटे।
कई बार सामने आ चुकी हैं खामियां, ठेकेदारों पर फिर भी मेहरबानियां
बता दें कि निगम की ओर से 22 करोड़ रुपये प्रति साल सफाई पर खर्च किया जा रहा है। शहर को तीन जोन में बांटा गया है। तीनों में चेकिंग के दौरान भारी खामियां पाई जा चुकी हैं, कहीं वाहन पूरे नहीं हैं तो कहीं कर्मचारी। बावजूद इसके ठेकेदारों पर निगम अधिकारियों की मेहरबानियां सवाल खड़े कर रही हैं। कई बार निगम कमिश्नर डॉ. प्रियंका सोनी मौके पर पहुंचकर ठेकेदारों की खामियों को भी पकड़ चुकी हैं। अधिकारियों द्वारा ठेकेदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं किये जाने पर आखिरकार सफाई कर्मचारियों ने ही मोर्चा खोला और ठेकेदारों की सच्चाई बयान की।
पीएफ तो छोड़ो वेतन ही नहीं मिल रहा
वीरवार सुबह जब जोन-2 के ठेकेदार ने सफाई कर्मचारियों को बुलाकर वेतन बांटना शुरू किया तो ठेकेदार ने सभी कर्मचारियों को 9200 रुपये के चेक दे दिए, जबकि पीएफ और अन्य कटौती करने के बाद उनका वेतन 10436 रुपये बनता है। कम वेतन मिलने से परेशान सफाई कर्मचारियों ने चेक लेने से इकार कर दिया और सामूहिक हड़ताल पर चले गए। कर्मचारियों ने ताऊ देवीलाल चौक स्थित डंपिंग जोन में एकत्रित होकर निगम और ठेकेदार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। कर्मचारियों ने बताया कि पीएफ के नाम पर उनके पैसे काटे जा रहे हैं, लेकिन मिलता उन्हें कुछ नहीं हैं। बिमला, रोशनी देवी, कमला ने कहा कि ये पीएफ कहां जाता है, हमें नहीं पता। इतना नहीं पीएफ तो छोड़ो हमें तो वेतन ही नहीं दिया जा रहा है।
डिप्टी कमिश्नर और ईओ ने ठेकेेदार को लगाई फटकार
नगर निगम के डिप्टी कमिश्नर रोहताश बिश्नोई और ईओ धीरज कुुमार ने सफाई कर्मचारियों की पूरी बात सुनने के बाद ठेकेदार को फटकार लगाई। दोनों अधिकारियों ने ठेकेदार को निर्देश दिए कि सभी कर्मचारियों के एक महीने का वेतन तुरंत प्रभाव से दिया जाए। इसी के साथ बाकी बचे हुए वेतन का 15 जनवरी तक भुगतान करने के भी आदेश दिए। इस पर ठेकेदार कुनाल मदान ने कहा कि कुछ कर्मचारियों का बैंक खाता नहीं खुल पाया है तो डीएमसी ने ठेकेदार को कड़ी फटकार लगाई और कहा कि हमें चलाने की जरूरत नहीं है। मुझे सब पता है कि खाता कितने दिन में खुलता है।
ठेकेदार कुनाल मदान ने कई तरह की दलीलें देने की कोशिश की, लेकिन न तो अधिकारियों ने उनकी बात सुनी और न ही कर्मचारियों ने। उधर जोन नंबर एक के ठेकेदार वीरेंद्र सिवाच और दो से अहमद अंसारी का कहना है कि कर्मचारी छुट्टी पर थे, इसलिए पैसे काटे गए हैं, लेकिन कर्मचारियों का दावा है कि स्वच्छता सर्वेक्षण के चलते उनकी संडे की भी छुट्टी बंद की हुई है।
कार्ड भी गलत बना दिए, पति को बना दिया पिता
ठेकेदारों द्वारा सभी महिला और पुरुष सफाई कर्मचारियों के पहचान पत्र जारी किए गए हैं। इन पहचान पत्रों में महिलाओं के लिए अलग से पति के नाम का कॉलम नहीं दिया गया है। इसका विरोध भी महिला सफाई कर्मचारियों ने किया। महिला सफाई कर्मचारियों ने कहा कि जहां पिता के नाम का कॉलम है ठेकेदार ने वहां उनके पति का नाम लिखवाया है। महिला कमलेश, चित्रा, बीरो देवी का कहना है कि कई बार इसकी शिकायत कर चुके हैं, लेकिन ठेकेदार सुनवाई नहीं कर रहे हैं।
हर साल 22 करोड़ रुपये का है ठेका
नगर निगम की ओर से प्रति साल सफाई के नाम पर 22 करोड़ रुपये खर्च किये जा रहे हैं। दिन की सफाई के लिए शहर की तीन जोन में बांटा गया है, जबकि रात को शहर के बाजारों की सफाई के लिए अलग से ठेका दिया गया है। हर जोन में ठेकेदार द्वारा सफाई कर्मचारी लगाए गए हैं, लेकिन निगम द्वारा इतना पैसा खर्च करने के बाद सफाई करने वाले पैसे को तरस रहे हैं। सवाल ये है कि आखिरकार पैसे काटे क्यों जा रहे हैं और काटे जा रहे हैं तो वे किसकी शह पर काटे जा रहे हैं।
बता दें कि जोन नंबर 1 में 323, जोन नंबर 2 में 260 और जोन नंबर तीन में 241 सफाई कर्मचारी ठेके पर रखे गए हैं। इसके अलावा रात को 168 के करीब कर्मचारी हैं। इसके अलावा निगम के पास स्थायी सफाई कर्मचारी 220 हैं और अनुबंध आधार पर 162 हैं। निगम के अंतर्गत कुल सफाई कर्मचारियों की संख्या 1633 है। इस बारे में निगम के कार्यकारी अधिकारी धीरज कुमार का कहना है कि किसी के साथ गलत नहीं होने दिया जाएगा। इस पूरे मामले की जांच कराएंगे और कर्मचारियों को पूरे पैसे दिलाए जाएंगे।
गलियों में नहीं होटल में कराई जाती है सफाई
मीडिया के सामने सफाई कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि ठेकेदार उन्हें गलियों में सफाई करने की बजाए एक होटल में सफाई करने भेजता है, मना करते हैं तो नौकरी से हटाने की धमकी देता है। इसके अलावा कई कर्मचारियों ने यह भी शिकायत की कि ठेकेदार उनसे डबल शिफ्ट में ड्यूटी लेता है। चरणजीत समेत अन्य ने बताया कि वे सुबह सात बजे से लेकर शाम पांच बजे तक ड्यूटी करते हैं, इसके बाद स्वच्छता एप पर आई शिकायतों को निपटाने के लिए इसके बाद उन्हें अलग-अलग स्थानों पर भेजा जाता है।