नियमों को ताक पर रख आउट डेटिड ट्रैक्टरों से एकत्रित किया जा रहा कूड़ा
करनाल।
स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 को लेकर नगर निगम ने कमर कस ली है, वहीं बार बार चेतावनी और नोटिस देने के बाद भी सफाई ठेकेदार अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। कभी सफाई कर्मचारी कम मिलते हैं तो कभी वाहन। शनिवार को जोन नंबर-1 और जोन नंबर 2 में की गई चेकिंग में एक और खुलासा हुआ। जांच में पाया गया कि सफाई ठेकेदार कंडम वाहनों से कूड़े की ढुलाई कर रहे हैं, इसके साथ ही दोनों ही जोनों में सफाई के वाहन पूरे नहीं मिले। इस पर निगम के डीएससी रोहताश विश्नोई ने ठेकेदारों ने जमकर खिंचाई की और चेताया कि ऐसा नहीं चलेगा। साथ ही कम मिले वाहनों की राशि ठेकेदार की पेमेंट में से काटने के आदेश दिये। सफाई को लेकर एक्शन मोड़ में चल रहे नगर निगम की ओर से शनिवार को जोन-1 और 2 की चेकिंग की गई। उप निगमायुक्त रोहताश विश्नोई व कार्यकारी अधिकारी धीरज कुमार ने सफाई कार्य में लगे कर्मचारियों व कूड़ा उठाने वाले साधनों की जांच की। उनके साथ मुख्य सफाई निरीक्षक महावीर सोढ़ी व सफाई निरीक्षक सुरेंद्र चोपड़ा मौजूद रहे। निरीक्षण में ठेकेदारों के पास वर्ष 1992 और 1998 के ट्रैक्टर प्रयोग में पाये गए, जबकि टेंडर की शर्त में साफ लिखा है कि ट्रैक्टर 2010 के या फिर इसके बाद के होने चाहिए। कई ट्रैक्टरों के टायर बिल्कुल खत्म मिले और ब्रेक आदि में दिक्कत मिली, जो किसी भी समय हादसे को निमंत्रण दे सकते हैं। दोनों जोनों में 15 ट्रैक्टर आउट डेटेड मिले। इतना ही नहीं 9 ट्रैक्टर के रजिस्ट्रेशन के दस्तावेज नहीं मिले। इसके अलावा, निर्धारित कूड़ा ढोने के वाहनों की संख्या भी कम पाई गई। उप निगमायुक्त ने इस पर ठेकेदारों को कड़ी फटकार लगाई और चेताया कि यहां पर ऐसा नहीं चलेगा, निगम की शर्तों के अनुसार ही काम करना होगा। वर्ष 2010 से पहले के ट्रैक्टरों के स्थान पर दूसरे ट्रैक्टर चलाने होंगे, इसके बाद ही पेमेंट की जाएगी। गौरतलब है कि शहर से प्रतिदिन 120 से 130 टन कचरा एकत्रित किया जाता है।
26 कर्मचारी कम मिले, 9 ट्रैक्टर मिले आउट डेटिड
सेक्टर-7 स्थित मार्केट परिसर में हाजिरी चैक करने के लिए जोन-1 के सभी कर्मचारी एकत्र किए गए। कूड़ा उठाने वाली रिक्शा-रेहड़ी, टिप्पर, ट्रैक्टर-ट्राली व डंपर प्लेसर जैसे साधनों को भी लाईनों में खड़ा किया गया था। इस दौरान अधिकारियों ने वार्ड अनुसार सफाई कर्ताओं की उपस्थिति का उनकी लिस्ट के साथ मिलान किया। इस जोन में सफाई कर्मचारियों की कुल संख्या 301 है, जिनमें से 26 अनुपस्थित मिले। इसी प्रकार, डोर टू डोर कूड़ा उठाने वाली 14 टिप्पर गाड़ियों की संख्या पूरी मिली। कूड़ा ढोने वाले 14 ट्रैक्टर-ट्रालियों की संख्या तो पूरी थी, लेकिन 9 ट्रैक्टर वर्ष 2010 से नीचे के मॉडल के थे, जबकि 2 डम्पर प्लेसर, 1 जेसीबी व 1 रिफ्यूज कलेक्टर भी मौजूद मिला। एक ट्रैक्टर चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं मिला।
100 में से 63 मिली रेहड़ी, 6 ट्रैक्टर पुराने मॉडल के
जोन-2 के सफाई कर्मचारियों व कूड़ा उठाने वाले साधनों की संख्या पुरानी सब्जी मंडी परिसर में चेक की गई। इस दौरान घर-घर से कूड़ा उठाने वाले 20 टिप्पर पूरे मिले। रिक्शा-रेहड़ी 100 की बजाए 63 थी, लेकिन कूड़ा उठाने के लिए 4 ई-रिक्शा साधनों में शामिल थी। ठेकेदार का तर्क था कि एक ई-रिक्शा कम से कम 3 रिक्शा-रेहड़ियों के बराबर कूड़ा उठाने में सक्षमता से कार्य करती है। जोन-2 में ट्रैक्टर-ट्राली की संख्या पूरी 18 थी, लेकिन 6 ट्रैक्टर पुराने मॉडल के थे। चेकिंग के दौरान 9 ट्रैक्टरों के रजिस्ट्रेशन इत्यादि के कागजात पूरे नहीं थे, जिनकी रिपोर्ट जोन इंचार्ज डीएमसी रोहताश विश्नोई द्वारा मौके पर ही नोट कर ली गई। इस जोन में सफाई कर्ताओं की संख्या 273 है, जिनमें से आज उपस्थिति चैक करने के दौरान 8 व्यक्ति अनुपस्थित पाए गए। जेसीबी, लोडर, डम्पर प्लेसर व रिफ्यूज कलेक्टर संख्या में पूरे पाए गए। दोनों जोन के ट्रैक्टरों में जीपीएस सिस्टम लगाया गया मिला। डीएमसी रोहताश विश्नोई ने बताया कि जोन-1 व 2 में जो भी खामियां मिली हैं, उनकी रिपोर्ट तैयार करके ठेकेदार की पेमेंट में से कटौती की जाएगी।
पहले भी कम पाये जा चुके हैं वाहन और कर्मी
बता दें कि सफाई को लेकर शहर में ठेकेदारों द्वारा की जा रही मनमर्जी को अमर उजाला लगातार प्रकाशित करता रहा है। गत 2 अक्टूबर से दिये गए 19.25 करोड़ रुपये सालाना ठेके में अब तक की गई चेकिंग में भारी खामियां पाई गई हैं। शहर को तीन जोनों में बांटा गया है, ताकि अलग अलग ठेकेदारों पर निगरानी रखी जा सके, लेकिन ठेकेदार अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। पिछले दिनों की गई चेकिंग में जहां 103 तक सफाई कर्मचारी कम पाए गए थे, वहीं वाहनों की संख्या भी निर्धारित से कम पाई गई थी। एक भी जोन ऐसा नहीं पाया गया, जिसमें खामियां न हों। इन खामियों को लेकर अमर उजाला लगातार प्रमुखता से प्रकाशित कर रहा है और ठेकेदारों द्वारा बरती जा रही चाला कियों का खुलासा कर रहा है।
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शहर की संपूर्ण साफ-सफाई के लिए तीन जोन बनाकर उनका अलग-अलग ठेका दिया गया था और ठेकेदारों ने सफाई को लेकर सभी शर्तों को पढ़कर ही ठेका लिया था। नगर निगम सफाई को लेकर पाई जाने वाली खामियों को अनदेखा नहीं करेगा, कोताही जीरो टॉलरेंस पर रखी जाएंगी। चेकिंग का कार्य इसी तरह जारी रहेगा। सफाई को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दास्त नहीं की जाएगा।
-डॉ. प्रियंका सोनी, निगम आयुक्त।