लगातार कट रहे पेड़, बचाने को विभाग तैयार नहीं
विकास के नाम पर कर्ण नगरी में धड़ाधड़ हरियाली को धराशायी किया जा रहा है। पिछले एक साल में पांच हजार पेड़ काटे जा चुके हैं। इसके अलावा 1500 से ज्यादा पेड़ बारिश व आंधी में गिर चुके हैं। इसके अलावा, वन विभाग भी पेड़ों को बचाने के लिए कुछ खास नहीं कर पा रहा है। हालांकि, विभाग दावे कर रहा है कि वह लगातार पेड़ लगा रहे हैं, लेकिन लगे हुए पेड़ों को ही विभाग के ट्री गार्ड की रोक रहे हैं। शहर में सैकड़ों की संख्या में ऐसे पड़े हैं, जो काफी ऊंचे और बड़े हो चुके हैं, लेकिन आज तक कई साल के बाद भी उनके ऊपर लगाए गए ट्री गार्ड हटाये नहीं गए हैं। इससे पौधों को वृद्धि रुक रही है। गौरतलब है कि शहर में जितनी आबादी होती है, उसके हिसाब से ही पेड़ों की संख्या होनी होती है। करनाल में अच्छी संख्या में पेड़ हैं, लेकिन पिछले एक साल से करनाल में आर्वधन नहर के साथ निकलने वाले बाईपास के नाम पर, गांधी चौक से मेडिकल कॉलेज तक जाने वाली सड़क तक और इंद्री रोड की चौड़ाई बढ़ाने पर करीब पांच हजार पेड़ काटे चुके हैं। अभी यह दौर रुका नहीं है। इसी प्रकार मेडिकल कालेज में सेे भी सैकड़ों की संख्या में पेड़ काटे जा चुके हैं। हालांकि, इसके स्थान पर पेड़ लगाने के दावे किये जा रहे हैैं, लेकिन ये दिख नहीं रहे हैं।
घोघड़ीपुर गांव में बनाया जाना था सिटी फारेस्ट केंद्र, जमीन न मिलने से कागजों में उलझा
शहर से 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गांव घोघड़ीपुर में सिटी फारेस्ट केंद्र बनाने की योजना थी। इसके लिए 125 एकड़ जमीन की जरूरत थी। जिसे चिह्नित कर लिया गया है। जबकि पंचायत यह जमीन देने के लिए तैयार नहीं है। ऐसे में सरकार की यह केवल कॉगजों तक ही सिमटकर रह गई है। जमीन को लेकर ही सरकार और पंचायत के बीच पेंच फंसा हुआ है। इस केंद्र में 66 प्रतिशत हरियाली और 33 प्रतिशत जमीन में साईकल ट्रेक, जोगिंग ट्रैक, बच्चों के लिए झूले व अत्याधुनिक सुविधाएं बनाई जानी है। जीवन, जमीन के अस्तित्व को बचाने और संवारने के लिए यह योजना बनाई गई थी। जोकि सिरे नहीं चढ़ पाई है। इसी तरह सरकार द्वारा पर्यावरण को लेकर चलाई जा रही योजनाएं भी ठप्प हो रही हैं।
अटल पार्क में धड्ड़ले से कट रहे पेड़
शहर के सबसे बड़े पार्क अटल पार्क में बहुत अधिक हरियाली थी, यहां हर रोज हजारों लोग सुबह और शाम को शहर के लिए पहुंचते हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से पार्क से लगातार पेड़ों की कटाई की जा रही है। वहीं पेड़ों को काटकर पार्क में सूखने के लिए ही डाल दिया जाता है। इस ओर न तो वन विभाग का ध्यान है और न ही हुडा का। वहीं पिछले दिनों अटल पार्क में आग लग जाने से भी कई पेड़ जलकर राख हो गए थे। अगर आगे भी यही सिलसिला जारी रहा तो दोनों विभागों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया तो आने वाले समय में पार्क में कहीं भी पेड़ नजर नहीं आएंगे।
क्या कहते हैं डीएफओ
इस बारे में डीएफओ विजेंद्र सिंह का कहना है कि पिछले एक साल में विकास कार्यों को लेकर करीब 5 हजार के करीब पेड़ कटे हैं। हालांकि, इसके बदल और पेड़ लगाए जा रहे हैं। वहीं, बारिश व आंधी के कारण करीब 1500 पेड़ गिर चुके हैं। जहां तक पेड़ों में ट्री गार्ड फंसने की बात है तो इन्हें निकलवाया जाएगा और अटल पार्क में काटे गए पेड़ों को लेकर पूछताछ की जाएगी। हमारा प्रयास है कि करनाल ग्रीन रहे और यहां पर पेड़ ज्यादा उगाए जाएं।