अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। नगर निगम की अधूरी तैयारियों के बीच स्वच्छ सर्वेक्षण-2019 को लेकर चार सदस्यीय टीम ने शहर में पहुंच गई है। टीम निगम के अधिकारियों को बिना जानकारी दिए शहर में सर्वे कर रही है। हालांकि, टीम आने की भनक लगते ही निगम के अधिकारी अलर्ट हो गए हैं, बावजूद इसके सेक्टरों और पुराने शहर के हालात नहीं सुधरे हैं। सफाई को लेकर अभी भी वही पुराना ढर्रा चल रहा है। ऐसे में आशंका है कि निगम की अधूरी तैयारियां कहीं स्वच्छता रैंकिंग को कम न कर दें। दूसरी ओर, नीलोखेड़ी और इंद्री नगरपालिका में भी सर्वेक्षण किया गया है।
बता दें कि इस समय करनाल प्रदेश में सबसे स्वच्छ शहर का दर्जा प्राप्त है, साथ ही देश में इसका नाम 65वां है। निगम अधिकारी शुरू ही दावा करते आए हैं कि इस बार देश के टॉप टेन में करनाल का नाम शामिल कराना है। इसके लिए निगम के अधिकारियों ने पिछले साल की अपेक्षा सफाई का बजट 22 से बढ़ाकर 27 करोड़ रुपये कर दिया। बावजूद इसके सफाई के मामले में शहर के हालात बदले नहीं। कर्मचारियों व वाहनों की संख्या तय नहीं होने के कारण इस बार निगम के चार सफाई ठेकेदार मनमर्जी कर रहे हैं।
निगम के अधिकारियों का भी उन पर ज्यादा नियंत्रण नहीं है। ऐसे में निगम के सभी 20 वार्डों से सफाई के मामले में पार्षद शिकायत कर रहे हैं। बावजूद इसके समाधान करने वाला कोई नहीं है। ये सभी चीजें स्वच्छ सर्वेक्षण में भारी पड़ सकती हैं। इससे भी बड़ी बात ये है कि देश में 4 जनवरी से शुरू हुए सर्वेक्षण की सूचना होने के बावजूद निगम के अधिकारी इसके प्रति गंभीर नहीं दिखे। अमर उजाला द्वारा लगातार सफाई के मामले को प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया और शहर में खराब सफाई व्यवस्था के हालात से रूबरू कराया। निगम के सूत्रों का दावा है कि चार सदस्यीय सर्वेक्षण टीम शहर में आ चुकी है और टीम ने अपना काम शुरू कर दिया है। हालांकि, इस बार टीम के सदस्यों ने खुद के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है और न ही निगम के अधिकारियों से मिल रहे हैं। चार सदस्य गोपनीय तरीके से अलग-अलग हिस्सों में जाकर अपना कार्य कर रहे हैं। साथ ही लोगों की फीडबैक भी ले रहे हैं।
नीलोखेड़ी और इंद्री में किया सर्वे
बता दें इस बार जिले की सभी नगर पालिका भी इस सर्वेक्षण का हिस्सा हैं। सबसे पहले टीम चार दिन तक नीलोखेड़ी और इंद्री नगर पालिका का सर्वे किया है। अब शहर के बाद घरौंडा, असंध और तरावड़ी नगर पालिका के अंतर्गत कस्बों का सर्वे किया जाना है। सफाई के मामले में शहर के साथ साथ सभी नगरपा लिकाओं के हालात भी ऐसे हैं।
इस बार 5000 अंकों की है परीक्षा
स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 में इस बार बदलाव किया गया है। 4000 अंकों से बढ़कर 5000 अंकों वाले सर्वे के चार भाग होंगे। हर भाग 1250 अंकों का है। प्रमाणीकरण का नया भाग जोड़ा है। इसका 20 प्रतिशत स्टाफ रेटिंग और 5 प्रतिशत ओडीएफ, ओडीएफ प्लस, ओडीएफ प्लस-प्लस का होगा। बता दें कि देश के सभी शहरों और नगरों में 4 जनवरी से सर्वेक्षण चल रहा है और यह 31 जनवरी तक चलेगा। गौरतलब है कि स्वच्छता सर्वेक्षण 2016 में देश के 73 शहरों को शामिल किया था। सर्वेक्षण 2017 में 434, सर्वेक्षण 2018 में 4203 और वर्ष 2019 के लिए देश के सभी शहरों को शामिल किया गया है।
यूं मिलेंगे अंक
स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 में तीन घटक थे, जो कि कुल 4000 अंकों के थे। इसमें सेवा स्तर प्रगति 35, प्रत्यक्ष अवलोकन 30 और नागरिक प्रतिक्रिया 35 प्रतिशत का भाग था। इस बार नया घटक जोड़कर कुल चार घटक हो गए हैं। प्रत्यक्ष अवलोकन 25, नागरिक प्रतिक्रिया 25, सेवा स्तर प्रगति 25, प्रमाणीकरण 25 प्रतिशत हिस्सा होगा। कचरा मुक्त शहर के लिए 1000 और ओडीएफ को लेकर 250 अंक से रेटिंग तय है।
पार्षदों ने फिर जताई नाराजगी
वार्ड नंबर 2 के पार्षद बलविंद्र सिंह, वार्ड 15 से युद्धवीर सैनी ने फिर से सफाई व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। पार्षदों का कहना है कि शहर के हालात खराब होते जा रहे हैं। वार्डों में जरूरत ज्यादा सफाई कर्मचारियों की है, लेकिन ठेकेदारों के पास कर्मचारी नहीं है। इसके साथ ही गलियों में झाड़ू लगाई जा रही है, नालियां ब्लॉक हो गईं हैं। पार्षदों ने कहा, निगम के अधिकारी केवल सर्वेक्षण के समय ही शहर में सफाई कराते हैं। ठेकेदारों पर अधिकारियों का कोई नियंत्रण नहीं है। हालात यही रहे तो स्वच्छता में शहर की रैंकिंग नीचे जा सकती है।
वर्जन
नगर निगम स्वच्छता को लेकर शुरू से ही गंभीर है। स्वच्छ सर्वेक्षण को लेकर टीम के आने की हमें जानकारी नहीं है। इस बार टीम अचानक आएगी और बिना किसी को बताए ही सर्वे करेगी। शहर में पूरी तरह से सफाई हो रही है। -धीरज कुमार, डीएमसी।