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टोल प्लाजा पर बढ़े टकराव के हालात, सामाजिक संस्थाएं टोल फ्री और कंपनी टैक्स लेने पर अड़ी

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अमर उजाला ब्यूरो
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करनाल (घरौंडा)। बसताड़ा टोल प्लाजा को लेकर टकराव की स्थिति दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। एक तरफ घरौंडा की सामाजिक संस्थाएं व आसपास के दर्जनभर से ज्यादा गांव लोकल वाहनों के लिए टोल फ्री पर अड़े हैं, वहीं कंपनी भी कोई छूट देने के मूड में नहीं है और साफ कर दिया है कि सभी वाहन चालकों को टैक्स देना पड़ेगा। ऐसे में तनाव बढ़ गया है और रोजाना टोल प्लाजा क्रास करने को लेकर झगड़े हो रहे हैं, वाहन चालक निशुल्क जाने पर अड़ते हैं तो तुरंत कंपनी के अधिकारी व कर्मचारी गाड़ी को घेर लेते हैं।
सोमवार को घरौंडा की सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारियों ने मामले को लेकर टोल प्लाजा मैनेजर का घेराव किया और टोल फ्री करने की मांग की। हालांकि, कंपनी के अधिकारियों ने इससे साफ इंकार कर दिया। इस दौरान करीब एक घंटे तक दोनों में कड़ी नोंकझोंक चली। फिलहाल तनाव बना हुआ है, प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जा रहा है। ऐसे में किसी भी समय यहां पर कोई बड़ा विवाद होने की आशंका बढ़ती जा रही है।
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शहर की सामाजिक संस्थाएं टोल प्लाजा को लोकल वाहन चालकों के लिए फ्री करवाने की जद्दोजहद में लगी हुई हैं। सामाजिक संस्थाओं के विरोध को एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी लोकल वाहन चालकों के लिए टोल फ्री को लेकर किसी प्रकार स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई हैं। सोमवार को टोल अधिकारियों से मिलने पहुंची शहर की दर्जनभर संस्थाओं के पदाधिकारियों का दावा है कि टोल अधिकारियों ने लोकल वाहन चालकों के लिए टोल फ्री का आश्वासन दिया है, जबकि टोल कंपनी के डीजीएम माथुर का कहना है कि टोल कंपनी ने अपना फैसला वापस नहीं लिया हैं और लोकल वाहन चालकों को लोकल टोल पास बनवाना अनिवार्य है।
शहीद मलखान सिंह जागृति मंच, ट्रक यूनियन, भारत विकास परिषद शाखा घरौंडा सहित शहर की दर्जनभर सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारियों ने बसताड़ा टोल प्लाजा के मैनेजर से मुलाकात की। उन्होंने टोल फ्री करने को लेकर टोल अधिकारियों से बातचीत की, लेकिन अधिकारियों की तरफ से किसी प्रकार का संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इससे सामाजिक संस्थाओं का गुस्सा बढ़ गया और लगभग घंटेभर सामाजिक संस्थाओं व टोल अधिकारियों के बीच नोकझोंक होती रही। बाद में यातायात पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचें और मामले को शांत करवाने का प्रयास किया। सामाजिक कार्यकर्ता राजीव सैन, रिंकू राणा, मुनीष गुप्ता, सुभाष चोपड़ा, प्रवीन जग्गा, सुरेंद्र सिंगला, विकास राणा, मोहिंद्र सोनी, हरबंस चुघ, विक्रमजीत, मनप्रीत, सुशील व अन्य टोल मैनेजर को लोकल वाहन चालकों को टोल को लेकर आने वाली दिक्कतों के बारे में बताया और कहा कि लोकल वाहन चालक टोल से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर रहते हैं। पहले जब साढ़े तीन साल तक उनसे टोल नही वसूला गया तो अब उन पर टोल थोपना क्या न्याय संगत है? उन्होंने बताया कि सामाजिक संस्थाओं के सख्त रवैया अपनाने के बाद टोल अधिकारियों ने पहले की भांति टोल फ्री किए जाने का आश्वासन दिया है।

कोई छूट नहीं मिलेगी : डीजीएम
सामाजिक संस्थाओं को लोकल वाहन चालकों के लिए टोल फ्री करने का कोई आश्वासन नहीं दिया गया है। लोकल वाहन चालकों को 150 और 300 रुपये के टोल पास बनवाना अनिवार्य है। किसी प्रकार की कोई छूट लोकल वाहन चालकों के लिए नही हॅै। टोल प्लाजा पर या तो टैक्स देकर गुजरा जा सकता है या फिर पास बनवाकर। फिलहाल कंपनी की ओर से रियायत देने का कोई प्रावधान नहीं है।
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-संजय माथुर, डीजीएम, टोल कंपनी।

हम आंदोलन को तैयार : शेखुपरा
ये हमारा हक है, इसे हम लेकर रहेंगे। लोगों के साथ ठगी नहीं होने दी जाएगी। जिस समय तीन साल पहले ये टोल प्लाजा स्थापित किया गया था, उस समय पूरे घरौंडा व आसपास के लोगों ने इसका विरोध किया था, तब कंपनी ने स्थानीय लोगों को टोल टैक्स से राहत दी थी, लेकिन अब कंपनी अपने वादे से मुकर रही है, हम इसका विरोध करते हैं और इसके लिए आंदोलन को तैयार हैं। -जेपी शेखुपरा, युवा बोलेगा मंच के अध्यक्ष।
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