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ढाई साल पहले करनाल मार्केट कमेटी में स्पेशल आडिट टीम ने पकड़ी 50 करोड़ की गड़बड़ी, कार्रवाई की बजाए अफसरों पर मेहरानी

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अमर उजाला ब्यूरो
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करनाल।
मार्केट कमेटी करनाल भ्रष्टाचार की कमेटी बनती जा रही है। यहां पर गड़बड़ी पर गड़बड़ी और घोटालों पर घोटाले पकड़े जाते हैं। कार्रवाई के नाम केवल खानापूर्ति की जाती है। इसका एक उदाहरण है वर्ष-2015 की स्पेशल ऑडिट।
इसमें कमेटी के अंदर करीब 50 करोड़ रुपये की गड़बड़ी पकड़ी गई थी, लेकिन आज तक उन कर्मचारियों और अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उल्टा उन्हें मलाईदार सीटों पर रखकर उन पर खास मेहरबानी की जा रही है। ऐसे में सवाल ये है कि कमेटी की जड़ों तक फैले भ्रष्टाचार का खात्मा कैसे होगा?
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मामले के अनुसार, कमेटी के अंदर फैले भ्रष्टाचार की भनक लगने पर हरियाणा राज्य विपणन बोर्ड के मुख्य प्रशासक ने स्पेशल ऑडिट की जांच के आदेश दिये थे। इसके तहत तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया था। इसमें एक टीम का गठन किया गया था, ऑफिसर राकेश गुप्ता, राजेश सांगवान सीनियर अकाउंट ऑफिसर और अनिल कुमार मार्केट कमेटी पानीपत असिस्टेंट सचिव की टीम बनी थी, चीफ एडमिनिस्ट्रिेटर के आदेश पर। स्पेशल ऑडिट किया था। इसमें 2012 से लेकर 2015 तक के कार्यकाल को शामिल किया गया है। यह ऑडिट 26 अगस्त, 2015 से लेकर 19 सिंतबर, 2015 तक चला।

लोन लेकर कमेटी ने खुद चुकाए 19 करोड़, अब ब्याज लगाकर हो गए 26 करोड़
स्पेशल ऑडिट टीम ने अपनी जांच में पाया कि मार्केट कमेटी करनाल ने 19 करोड़, 80 लाख 52हजार 789 रुपये भू मालिकों को एन्हासमेंट के तौर पर चुकाया। इनके आदेश विभिन्न एलए (लैंड एक्वीजीशन) केसिस में हुए थे, यह राशि विभाग को प्लाट धारकों से रिकवर करनी थी, लेकिन तत्कालीन मार्केट कमेटी के सचिव ने ऐसा न करके कमेटी करनाल ने दूसरी मार्केट कमेटियों से लोन लेकर यह पैसा चुका दिया। अब मार्केट कमेटी करनाल को यह पैसा ब्याज समेत उन कमेटियों को वापस करना है। ऐसे में यह राशि 19 प्रतिशत ब्याज के हिसाब से 7 करोड़ रुपये बनती है, जो कुल 27 करोड़ रुपये कमेटी बनते हैं।

75 फाइलें जांची, मिलीं भारी अनियमितताएं
तीन सदस्यीय टीम ने जांच के दौरान मार्केट कमेटी की कुल 75 फाइलें चेक की थीं। इनमें भारी वित्त से लेकर रिकॉर्ड से संबंधित खामियां और अनियमितताएं पाई गईं हैं। जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में ये भी लिखा है कि मार्केट कमेटी करनाल की लापरवाही के कारण प्लॉट धारकों से यह पैसा रिकवर करने के लिए कोई प्रयास भी नहीं किये गए। लापरवाही का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मार्केट कमेटी की ओर से एक भी नोटिस प्लाट धारकों को नहीं दिया गया। इस नोन रिवकरी से कमेटी करनाल को भारी नुकसान हुआ है। टीम ने ये भी कहा है कि आज तक की यह बहुत बड़ी आर्थिक गड़बड़ी है। टीम ने ये भी कहा कि काफी संख्या में ऑफिस रिकॉर्ड मेंटेन नहीं पाया गया और न ही टीम के सामने पेश किया गया। टीम की रिपोर्ट के आधार पर मंडी बोर्ड ने अधिकारियों को शो काज नोटिस भी जारी किये थे, लेकिन आज तक किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।

ये मेरे से पहले का मामला है। फिलहाल सीजन के कारण व्यस्त हैं, सीजन समाप्त होते ही इस मामले को देखा जाएगा। जहां तक मुझे जानकारी है एन्हासमेंट को लेकर प्लॉट धारकों को कोई नोटिस जारी नहीं किये गए हैं। -जिले सिंह, सचिव, मार्केट कमेटी करनाल।
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प्रदेश सरकार जीरो टोलरेंस पर काम कर रही है। अगर कोई गलत कार्य करेगा या फिर गड़बड़ी करेगा तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हमारे यहां पर किसी भी प्रकार का रीलीफ नहीं दिया जाएगा। विभाग की सीधी सी नीति है, अच्छा कार्य करने वालों को प्रोत्साहित किया जाता है और भ्रष्ट आचार वालों के खिलाफ एक्शन।
-जयदीप सिंह, सचिव, एचएसएएमबी, पंचकूला।
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