टेंडर के फेर में अटका निवाला, दो महीने से 75 हजार लोग सस्ते राशन का कर रहे इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
राशन लिफ्टिंग की टेंडर प्रक्रिया न होने के कारण दो महीने से जरूरतमंद लोगों को राशन नहीं मिल रहा है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की ओर से सर्दी के मौसम को देखते हुए नवंबर माह से लोगों को सस्ते रेटों पर बाजरा देने की योजना चालू होने से पहले की दम तोड़ती दिखाई दे रही है। विभाग द्वारा समय पर राशन लिफ्टिंग की टेंडर प्रक्रिया न करवाने के कारण जरूरतमंद लोगों तक बाजरा नहीं पहुंच रहा है। लाभार्थियों को बाजरा मिलना तो दूर दो रुपये प्रति किलो मिलने वाला गेहूं भी पिछले दो माह से नहीं मिल पा रहा है। इस कारण लोग मार्केट से महंगे दामों पर राशन खरीदकर काम चला रहे हैं। जब तक टेंडर प्रक्रिया का मामला सुलझ नहीं जाता तब तक विभाग द्वारा राशन की लिफ्टिंग नहीं कराई जाएगी। जबकि लोगों को राशन उपलब्ध करवाने की लिहाज से डीएफएससी ने डिपो होल्डरों को खुद राशन उठाने के लिए बोला है। फिलहाल डिपो होल्डर राशन उठाने के लिए तैयार नहीं हैं। सेंटर से खुद राशन उठाने की बात को लेकर डिपो होल्डर एसोसिएशन के सदस्य लिखित ऑर्डर के इंतजार में है। होल्डरों का कहना है कि जब तक विभाग द्वारा किराये की राशि निर्धारित कर लिखित में उन्हें ऑर्डर नहीं दिए जाएंगे, तब तक वह राशन का उठान नहीं करेंगे।
बता दें कि नवंबर माह से सरकार द्वारा बीपीएल और एवाई परिवारों को बाजरा देने की योजना बनाई थी। अन्य जिलों में यह योजना ठीक चल रही है। लेकिन जिले के करीब नौ लाख लाभार्थियों को टेंडरिंग प्रक्रिया उलझ जाने के कारण योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। वहीं, अगर विभाग द्वारा अब भी टेंडर प्रक्रिया चालू की गई तो आगामी एक माह के बाद ही लोगों को राशन मिल पाएगा। इस बारे में डिपो होल्डर्स एसोसिएशन हरियाणा के प्रधान धर्मपाल गुप्ता ने बताया कि पूरे प्रदेश में केवल करनाल में ही राशन अटका है। ये विभाग की लापरवाही है, विभाग को चाहिए कि जल्द से जल्द इसका समाधान कराया जाए, ताकि लाभार्थियों को राशन समय पर मिल सके।
बीपीएल को आधा किलो प्रति यूनिट और एवाई को 5 किलो प्रति परिवार देना था बाजरा
सरकार की योजना के अनुसार नवंबर माह में जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा बीपीएल परिवार को आधा किलो प्रति यूनिट और एवाई श्रेणी को प्रति परिवार पांच किलो बाजरा देना था, जबकि दिसंबर में सरकार ने इसे बढ़ाकर बीपीएल परिवार के लिए एक किलो प्रति यूनिट और एवाई श्रेणी को 10 किलो प्रति परिवार देना था, लेकिन अब तक जिलेभर के उपभोक्ताओं को इसका फायदा नहीं मिल पा रहा है। अब सरकार ने बीपीएल और एवाई को ओपीएच श्रेणी में रखा है, जिनकी संख्या करीब 75 हजार है।
यूं उलझी लिफ्टिंग प्रक्रिया
जिले में कुल 580 डिपो हैं। राशन की सप्लाई तीन ट्रांसपोर्टर करते थे। अप्रैल माह में विभाग द्वारा टेंडर जारी किए जाने थे। लेकिन रेट कम होने के कारण किसी भी ट्रांसपोर्टर ने इसे स्वीकार नहीं किया। इसके बावजूद भी ट्रांसपोर्टर राशन की सप्लाई करते रहे। लेकिन जब उनके रेट को विभाग ने नहीं माना तो एक ट्रांसपोर्टर कोर्ट में चला गया। इसके बाद कोर्ट में केस चलने से खाद्य आपूर्ति विभाग ने किसी अन्य कंपनी को राशन सप्लाई का ठेका दे दिया। इसके खिलाफ भी एक ट्रांसपोर्टर कोर्ट में चला गया और शिफ्टिंग पर स्टे ले लिया। इसी कारण नवंबर माह में राशन की शिफ्टिंग प्रक्रिया उलझ गई है, जबकि अब डीएफएससी ने डिपो होल्डरों को खुद राशन उठाने के लिए बोला गया है।
राशन की लिफ्टिंग प्रक्रिया उलझने के कारण लोगों को दो माह का राशन नहीं मिल पाया है। अब डिपो होल्डरों को खुद राशन की लिफ्टिंग के लिए बोल दिया गया है। जल्दी ही डिपो होल्डरों द्वारा सेंटर से राशन उठाया जाएगा। डिपो होल्डरों द्वारा राशन उठाने के बाद लोगों को दोनों माह का बाजरा और गेहूं मिल पाएगा। -अनिल कुमार, डीएफएससी, करनाल।