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एफआईआर की चेतावनी में बीता एक साल : जीटी रोड बदहाल, न सोमा कंपनी चेती और न ही एनएचएआई कर पाया कोई कमाल, सड़क हो रही लाल

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अमर उजाला ब्यूरो
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करनाल। जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक। डीसी डॉ. आदित्य दहिया और सामने सोमा कंपनी और एनएचएआई के जूनियर अधिकारी। बैठक के पहले एजेंडे से लेकर अंतिम एजेंडे तक कंपनी और एनएचएआई की खामियां। समिति के सदस्यों द्वारा बार-बार दोनों के खिलाफ मोर्चा खोलना और उनकी कमियां बताना। फिर डीसी द्वारा कंपनी अधिकारियों की खिंचाई करना और केवल एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी देना। कंपनी अधिकारियों द्वारा भरे सदन में झूठे आश्वासन देना और सड़क गड्ढों के कारण रोजाना लोगों की जान जाना। बस यही है जिले की सड़क सुरक्षा समिति की बैठक।
किसी के खिलाफ न कोई चिट्ठी और न ही कोई मेल। हर माह करीब दो घंटे तक चलने वाली सड़क सुरक्षा की बैठक का नतीजा यही होता है। शुक्रवार को भी कुछ इसी तरह के हालात रहे। बैठक के दौरान डीसी द्वारा पांच बार एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी दी गई, कंपनी और नेशनल हाईवे अथॉरिटी के असिस्टेंट इंजीनियर का मुस्कान के साथ वही जवाब, सर, जल्द ठीक कर देंगे। लघु सचिवालय के सभागार में हुई बैठक में समिति के सदस्यों ने सोमा कंपनी पर जमकर हमला बोला और खराब हालात पर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। लेकिन डीसी केवल चेतावनी देने तक रहे। एक के बाद एक सदस्य ने एनएचएआई और सोमा कंपनी की मिलीभगत और खामियों पर खुलासा किया, लेकिन न तो कंपनी मानने को तैयार हुई और न ही एनएचएआई के अधिकारी। हालांकि, पूरे सदन के नेशनल हाईवे और टोल प्लाजा पर फैली अव्यवस्था और दरक रहे फ्लाईओवर की तस्वीरों के साथ पोल खोली, लेकिन ढीठ अधिकारी फिर भी यही कहते रहे कि जल्द ठीक कर देंगे। सवाल ये है कि आखिर कब तक इन कंपनी के लापरवाह और गैर जिम्मेदार अधिकारी जिम्मेदार लोगों की जान लेते रहेंगे?
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लापरवाही की हद : एक भी एजेंडे पर खरी नहीं उतर पाई कंपनी
सोमा कंपनी की लापरवाही और बेशर्मी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बैठक में पिछली बैठकों के 11 और नए 14 मामलों पर चर्चा की गई। इनमें से एक भी मामले पर कंपनी के अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। इसी प्रकार के हालात एनएचएआई के अधिकारी के रहे। सितंबर मास की बैठक में घरौंडा के पास एनएच-44 पर बने फ्लाईओवर से मिट्टी खिसकने का मामला जोर-शोर से उठा था, जो पिछले मीटिंग में भी पेंडिंग रहा। मीटिंग एनएचएआई के अधिकारियों ने बताया कि इस पर कार्य किया जा रहा है और स्लोप व क्रश बैरियर भी लगाए गए हैं, लेकिन कमेटी के अध्यक्ष व उपायुक्त किए गए कार्य के चित्र को देखकर संतुष्ट नहीं हुए और कहा कि यह अस्थायी इलाज है, पक्का कार्य करें, दोबारा होगा तो कार्रवाई होगी।

नहीं बनाए गए फुटओवरब्रिज, टैक्स जारी
एनएच-44 पर बराना, मनक माजरा और डेरा बाजीगर के पास ग्रामीणों द्वारा सड़क पार करने के लिए अवैध कट बनाए गए थे, एनएचएआई ने इन्हें बंद कर दिया। गैर-सरकारी सदस्यों ने आपत्ति उठाई कि कंबोपुरा, पक्के पुल के पास तथा कर्णेश्वर मंदिर के पास करीब एक साल से फुटओवर ब्रिज का सामान पड़ा है, जो अभी तक नहीं लगाए गए हैं। डीसी ने निर्देश दिए कि इन पर जल्दी काम हो। पक्का पुल के पास ही एनएच पर दोनों ओर की सर्विस लेन के वाहन जहां मेन लेन में जाकर मिलते हैं, उससे दुर्घटनाएं होती हैं। हालांकि यह मुद्दा पिछली बैठकों में भी उठाया गया और इसके समाधान के लिए एनएचएआई द्वारा पक्के पुल के पास आवर्धन नहर से गुजर रहे पुल को चौड़ा कर इसका विस्तार किया जाना था, जो अब तक नहीं किया गया। इस पर डीसी ने एनएचएआई के अधिकारियों को डांट पिलाई और कहा कि इसका प्रोजेक्ट तैयार कर इस पर कार्यवाही करें।

अधिकारी बोले, भर दिए गड्ढे, सदस्यों ने कहा, केवल दो तीन भरे
बलड़ी बाईपास के पास सर्विस लेन पर एनएचएआई अधिकारी ने बताया कि उन्होंने गड्ढे भर दिए हैं, लेकिन बैठक में उपस्थित गैर-सरकारी सदस्यों ने कहा कि इस पर अभी कार्रवाई नहीं हुई। डीसी ने आरटीए के प्रतिनिधि से कहा कि स्वयं चेक करें, झूठ हो तो एनएचएआई के खिलाफ भारत सरकार को लिखें। दूसरी ओर, पीडब्ल्यूडीबी एंड आर डिवीजन-वन के अधिकारियों ने बताया कि सौकंडा गांव से सग्गा टी-जंक्शन के पास गड्ढों की मरम्मत कर दी गई है। गैर सरकारी सदस्य प्रमोद गुप्ता, संदीप लाठर आदि ने अधिकारियों के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोला।

चिड़ाव रोड के गड्ढे भरने में संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए अधिकारी
करनाल-मेरठ रोड पर बड़े वाहनों के एनएच मेन लाइन पर एलिवेटेड एंट्री/एग्जिट का मुद्दा इस बार भी जोर-शोर से बैठक में उठा। गैर-सरकारी सदस्यों ने डीसी से कहा कि एनएचएआई के अधिकारियों की उदासीनता से इस पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस पर उपायुक्त ने एनएचएआई अधिकारियों को दोबारा डांट लगाई और एक महीने का समय देते हुए कहा कि इसका सर्वे कर कार्य की रिपोर्ट तैयार करें। इसी दौरान एन.एच.-709-ए के अधिकारी ने बताया कि डब्ल्यूजेसी पुल से चिड़ाव तक सड़क पर बने गड्ढों को भरने का काम शुरू कर दिया है। चिड़ाव से असंध रोड पर भी कार्रवाई की जा रही है, लेकिन अधिकारी के इस जवाब से गैर-सरकारी सदस्य और उपायुक्त कतई संतुष्ट नहीं हुए।

शहर के आठ चौक दोबारा से किए जाएंगे डिजाइन
नगर निगम आयुक्त राजीव मेहता ने बताया कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में इस तरह के 7-8 चौकों और रेड लाइट एरिया को लेकर कंपनी की ओर से स्टडी की जा रही है, इसके दोबारा डिजाइन बनाकर उन पर काम शुरू होना है, ताकि समस्या का स्थायी समाधान हो। उन्होंने यह भी बताया कि मुगल कैनाल फेज 2 के कार्य की प्रशासकीय स्वीकृति जल्द मिलने वाली है। मेरठ रोड आउटर बाईपास पर दुर्घटनाओं से बचाव के लिए स्पीड ब्रेकर बनाने की मांग उठाई गई। डीसी ने कहा कि इस जगह पर टेबल टॉप स्पीड ब्रेकर बनवाएं। पक्का पुल फ्लाईओवर से साइड मैटेरियल सरकने का मुद्दा भी उठाया गया।

फ्लाईओवर निर्माण की हो विजिलेंस जांच
गैर सरकारी सदस्यों ने बैठक में मांग की कि सोमा कंपनी द्वारा वर्ष 2008 में बनाए गए इन फ्लाईओवर की विजिलेंस से जांच करानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि र्निाण में घटिया सामग्री प्रयोग की गई है, लेकिन रोजाना कहीं न कहीं से पुल दरक रहे हैं और हादसे हो रहे हैं। इस पर डीसी ने कहा कि वे एनएचएआई के चेयरमैन को इसकी पत्र लिखकर जांच की मांग करेंगे।

मृतक स्कूली बच्चों को दी श्रद्धांजलि
शुक्रवार को हुई मासिक बैठक में समिति के अध्यक्ष एवं उपायुक्त डॉ. आदित्य दहिया ने पिछले दिनों करनाल-इंद्री रोड पर जनेसरों के पास स्कूल बस की ट्रक के साथ हुई भिड़ंत में मारे गए दो बच्चों व कई घायल बच्चों की घटना पर दुख व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि दी और बैठक में उपस्थित सड़क निर्माण व सुरक्षा से जुड़े विभागों के अधिकारियों से कहा कि भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति ना हो, ऐसे उपाय सुनिश्चित किए जाएं।
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अगर इंसानियत बची हो तो सड़क ठीक करो
बैठक के दौरान सोमा कंपनी और एनएचएआई अधिकारियों के गैर जिम्मेदार रवैये को लेकर डीसी काफी खिन्न दिखे। डीसी ने यहां तक कह डाला, महोदय क्या आप इस बैठक में सिर्फ चाय पीने आते हो? अगर आपके अंदर जरा सी भी इंसानियत बची है तो जीटी रोड को ठीक करो और जहां जहां खामियां हैं उनको दूर कर लोगों की जान बचाने का काम करो। आपकी ये लापरवाही कितने घरों पर भारी पड़ रही है, ये पता है आपको? हर बार कहते हो कर देंगे, करते कुछ नहीं हो, भगवान भी तुम्हें माफ नहीं करेगा।
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