अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। प्रदेश सरकार द्वारा मेयर के पद के लिए सीधे चुनाव कराने को लेकर बेशक मेयर की पावर बढ़ जाए, लेकिन पूर्व मेयर और पदाधिकारियों का कार्यकाल खत्म होते ही नगर निगम के अधिकारियों ने अचानक दफ्तर बदल डाले। निगम के आयुक्त राजीव मेहता ने अपना ऑफिस छोड़कर अब मेयर के ऑफिस पर डेरा जमा लिया है। रूम से मेयर के कमरे की नेम प्लेट हटाकर आयुक्त की पट्टी लगा दी गई है।
हालांकि, सीनियर डिप्टी मेयर कृष्ण गर्ग से भी आफिस खाली कराने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने ये कहकर इंकार कर दिया कि अभी भी लोग उनके पास कामों के लिए आते हैं, ऐसे में पार्षद या अन्य पदाधिकारी कहां पर बैठेंगे। फिलहाल उन्होंने कार्यालय पर कब्जा जमाया हुआ है।
बता दें कि एक जुलाई को नगर निगम के हाउस के पांच साल पूरे हो गए। ऐसे में सभी पार्षदों व पदाधिकारी पूर्व हो गए। कार्यकाल पूरा होने के बाद मेयर रेणु बाला ने सरकारी गाड़ी समेत ऑफिस छोड़ दिया। इसके बाद अब निगम के अधिकारियों ने अचानक से अपने अपने कार्यालय बदल दिए। सबसे पहले निगम आयुक्त राजीव गुप्ता ने अपना कार्यालय छोड़कर मेयर के ऑफिस पर डेरा जमाया। निगम आयुक्त के कार्यालय में अब ईओ धीरज कुमार बैठ रहे हैं। ईओ के कार्यालय में अन्य अधिकारी बैठने लगे हैं। खास बात ये है कि बेशक अधिकारियों ने मेयर के कार्यालय को अपना ऑफिस बना लिया, लेकिन वे सीनियर डिप्टी मेयर कृष्ण गर्ग व डिप्टी मेयर के ऑफिस को खाली नहीं करा पाए। वे लगातार अब भी कार्यालय आ रहे हैं और लोगों की समस्याएं वहीं बैठक कर सुनते हैं। बताया जाता है कि निगम के अधिकारियों ने उनको भी कार्यालय खाली करने के लिए कहा था, लेकिन वे इस पर बात अड़ गए कि लोग आखिर कहां जाएंगे, लोग तो निगम में ही आएंगे।
मेरा कार्यकाल खत्म हुआ, मुझे जानकारी नहीं : मेयर
इस बारे में पूर्व मेयर रेणु बाला गुप्ता का कहना है कि मुझे इसकी जानकारी नहीं है, क्योंकि मेरा कार्यकाल खत्म हो चुका है। जो भी नया मेयर चुना जाएगा, उसको प्रोटोकोल के तहत सरकारी गाड़ी और आफिस मिलता है। ऐसे में जब भी चुनाव होंगे और मेयर चुना जाएगा तो ये निगम के अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वो उनको कार्यालय दें, ये निगम का कार्य है। इससे ज्यादा मुझे इस बारे में कुछ नहीं कहना है।
खाली पड़ा था मेयर का कार्यालय, सुविधा के लिए किया बदलाव : ईओ
इस बारे में नगर निगम के कार्यकारी अधिकारी धीरज कुमार का कहना है कि निगम का कार्य सुचारू रूप से चले, इसके लिए कुछ बदलाव किए गए हैं। मेयर के कार्यालय पर कब्जा नहीं किया गया है। कोई भी कार्यालय किसी के लिए स्थाई नहीं है। हाउस का कार्यकाल खत्म होने के बाद मेयर का कार्यालय खाली पड़ा था, सुविधा के लिए ये कार्यालय आयुक्त को दिया गया है। इसमें कोई ऐसी मंशा नहीं है। जब भी चुनाव होंगे और नये मेयर आएंगे तो उनके लिए और अच्छा कार्यालय दिया जाएगा। ये कोई बड़ी बात नहीं है, सामान्य बात है।
...तो पार्षद कहां बैठेंगे : कृष्ण गर्ग
इस बारे में सीनियर डिप्टी मेयर कृष्ण गर्ग का कहना है कि बेशक हमारा कार्यकाल खत्म हो गया हो, लेकिन वार्डों के लोग अब भी पार्षदों के पास कार्य के लिए आ रहे हैं। अगर एक भी ऑफिस पार्षदों के लिए नहीं होगा तो वे बैठेंगे कहां? शहर के लोग रोजाना रूटीन के कार्यों के लिए निगम में आते हैं, इसलिए एक ऑफिस जरूरी है। ऑफिस में बैठकर हम अपना निजी कार्य नहीं करते, बल्कि लोगों की सेवा ही करते हैं।