करनाल। बाजारों में होली की रौनक है। मिठाइयों और डेयरी उत्पादों की बिक्री बढ़ी है। गत वर्ष खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से लिए गए खाद्य पदार्थों के 11 नमूने लैब में हुए जांच में असुरक्षित साबित पाए गए थे। नमूनों के फेल होने के बावजूद अब तक किसी पर कानूनी कार्रवाई नहीं हो सकी। वजह है जिले में नामित अधिकारी (डीओ) की तैनाती न होना।
31 जनवरी को डीओ सुभाष के सेवानिवृत्त होने के बाद से नई नियुक्ति नहीं हो पाई है। ऐसे में विभाग की कार्रवाई प्रक्रिया अधर में लटक गई है। कुल मिलाकर 40 सैंपल लिए गए जिनमें से 11 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे उत्पाद सीधे तौर पर उपभोक्ताओं की सेहत पर असर डाल सकते हैं, खासकर बच्चों और बुजुर्गों पर।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. कपिला ने स्वीकार किया कि डीओ की अनुपस्थिति में कानूनी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही। नियमों के अनुसार सैंपल लेने के बाद नोटिस जब्ती अभियोजन और दंडात्मक प्रक्रिया डीओ की स्वीकृति से ही आगे बढ़ती है। वर्तमान में विभाग सर्विलांस सैंपल ले रहा है लेकिन यदि इनमें से कोई नमूना असुरक्षित भी पाया जाता है तो उसके आधार पर सीधी कानूनी कार्रवाई संभव नहीं है। डीओ की तैनाती होते ही लंबित मामलों पर कार्रवाई की जाएगी।
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शहर में लैब, फिर भी जांच बाहर
करनाल में फूड सेफ्टी प्रयोगशाला मौजूद है और हरियाणा के कई जिलों के सैंपल यहां जांचे जाते हैं। इसके बावजूद करनाल के अनेक सैंपल चंडीगढ़ भेजे जाते हैं। इससे रिपोर्ट आने में समय लगता है।
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क्या कहता है नियम?
खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुसार खाद्य सुरक्षा अधिकारी स्वतंत्र रूप से सैंपल ले सकते हैं, बशर्ते निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाए। नमूना लेने, सील करने, पंचनामा तैयार करने और लैब भेजने के बाद उसकी सूचना डीओ को देना अनिवार्य है। अभियोजन की कार्रवाई डीओ स्तर से ही आगे बढ़ती है। वर्तमान में यही कड़ी गायब है। नतीजा फेल सैंपल होने के बावजूद दंडात्मक कार्रवाई संभव नहीं है।
मिठाई के तीन नमूने हुए थे फेल
सामग्री
नमूने लिए फेल
दूध उत्पाद 13
6
खाने का तेल 1
1
मिठाई
22 3
खाने की चीजें
4
1