करनाल। शहरवासियों को आवारा कुत्तों और बंदरों से राहत नहीं मिल सकती, क्योंकि नगर निगम ने बंदरों को पकड़ने से मना कर दिया है और आवारा कुत्तों को पकड़ने की अभी तक उन्होंने कोई योजना नहीं बनाई है। वहीं, दूसरी ओर शहर में आवारा कुत्तों व बंदरों को आतंक बढ़ता जा रहा है। आलम यह है कि एक माह में करीब 40 लोग इनके शिकार हो रहे हैं।
उधर नगर निगम कमिश्नर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की गाइड लाइन का हवाला दे रहे हैं कि अब नगर निगम बंदरों को नहीं पकड़ेगा, यह काम फॉरेस्ट डिपार्टमेंट का है, लेकिन वहीं दूसरी ओर वाइल्ड लाइफ इंस्पेक्टर का कहना है कि बंदरों को वह नहीं पकड़ेंगे, निगम ही बंदरों को पकड़ेगा एनजीटी की गाइड लाइन यह है कि वाइल्ड लाइफ इंस्पेक्टर या अन्य कर्मचारी की देखरेख में बंदरों को पकड़ा जाए। ऐसे में इन दोनों विभाग के बीच में यह बंदर पकड़ने का मामला अटक गया है। इस कारण शहरवासियों को बंदरों और आवारा कुत्तों की समस्या को ऐसे ही झेलना पड़ेगा।
अस्पतालों में आ रहे हैं डॉग व मंकी बाइट के केस
शहर के मेडिकल कॉलेज, नागरिक अस्पताल में भी डॉग और मंकी बाइट के केस बढ़ते जा रहे हैं। हर महीने 30 से 40 केस डॉग व मंकी बाइट के आ रहे हैं। इनमें बच्चे और महिलाएं ज्यादा हैं, क्योंकि गली में खेलते रहे बच्चों को कुत्ते काट लेते हैं तो वहीं छत पर बंदर महिलाओं को काट रहे हैं।
टेंडर के बाद भी 6 माह से नहीं पकड़े बंदर
नगर निगम ने बंदरों को पकड़ने का टेंडर दिया हुआ था। जो 28 फरवरी को खत्म हो गया है, लेकिन ठेकेदार ने पिछले छह महीने से ही बंदरों को पकड़ना बंद किया हुआ है। यही कारण है कि शहर में बंदरों की संख्या बढ़ती जा रही है।
डॉग और मंकी बाइट पर लगते हैं चार टीके, हर टीका 100 रुपये का
कुत्ते और बंदर के काटने पर चार एंटी रेबीज वैक्सीन के टीके लगाए जाते हैं। यदि पीड़ित के पास बीपीएल कार्ड है तो मेडिकल कॉलेज में उसे यह टीके फ्री में लगता हैं, नहीं तो पीड़ित को हर टीके के लिए 100 रुपये की पर्ची कटवानी पड़ती है। यदि पीड़ित बाहर किसी प्राइवेट अस्पताल से लगवाता है तो यह टीका महंगा लगता है।
इन बातों का रखें ध्यान
- कुत्ते व बंदर के काटने पर सबसे पहले टेटनेस का टीका लगवाएं।
- टेटनेस का टीका लगने के बाद अस्पताल में जाकर एंटी रेबीज वैक्सीन का टीका लगवाएं।
- कुत्ते व बंदर के काटने पर जख्म को साबुन लगाकर पानी से धोएं।
- अपने घर में छत पर जाने का दरवाजा बंद रखें।
एनजीटी की गाइडलाइन है कि नगर निगम बंदरों को नहीं पकड़ेगा। आवारा कुत्तों के लिए शेल्टर हाउस बनाया जा रहा है, इसके बाद ही कुत्तों को पकड़ने के बारे में सोचा जाएगा।-राजीव मेहता, आयुक्त, नगर निगम, करनाल।
नगर निगम पहले भी बंदरों को पकड़ता था और वह हमारे डिपार्टमेंट से परमीशन लेता था। एनजीटी की गाइड लाइन है कि जो भी बंदरों को पकड़ेगा वह हमारी परमीशन पर और देखरेख में पकड़ेगा। इससे अलग उच्च अधिकारियों से बात की जाएगी।-रामपाल, वाइल्ड लाइफ इंस्पेक्टर करनाल।
एनजीटी की गाइडलाइन में उलझे विभाग, शहरवासी बंदर और कुत्तों से परेशान