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मेडिकल कॉलेज में कॉन्ट्रेक्ट बेस पर रखा जाएगा न्यूरो सर्जन

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अमर उजाला ब्यूरो
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करनाल। कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में अब कॉन्ट्रेक्ट बेस पर न्यूरो सर्जन रखा जाएगा, ताकि हेड इंजरी के केस को रेफर ना किया जाए। न्यूरो सर्जन के लिए 26 दिसंबर को इंटरव्यू लिया जाएगा। हालांकि अभी तक मेडिकल कॉलेज के हेड ऑफिस से सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की सेंक्शन नहीं मिली है। इस लिए मेडिकल कॉलेज प्रबंधकों ने यह निर्णय लिया है कि जब तक सुपर स्पेशलिस्ट की सेंक्शन नहीं मिलती तब तक कांट्रेक्ट बेस पर न्यूरो सर्जन रखा जाएगा। इस मामले को अमर उजाला ने इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
न्यूरो सर्जन ना होने के कारण मेडिकल कॉलेज द्वारा एक्सीडेंट में हुई हेड इंजरी के केस को रेफर कर दिया जाता था और वे बीच रास्ते में ही दम तोड़ देते थे। इस खबर पर संज्ञान लेते हुए मेडिकल कॉलेज ने यह निर्णय लिया है ताकि मरीजों की जान न जाए। बता दें पिछले एक साल से मेडिकल कॉलेज द्वारा चार सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की सेंक्शन के लिए हेड ऑफिस पत्र भेजा हुआ है लेकिन वहां से अभी तक कोई जवाब नहीं मिला।
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हर महीने 60 से 70 केस आते हैं मेडिकल कॉलेज में हेड इंजरी के जिन्हें किया जाता है रेफर
मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में हर महीने 60 से 70 केस हेड इंजरी के केस आते हैं। जिन्हें रोहतक और चंडीगढ़ पीजीआई में रेफर किया जाता है। इनमें से कुछ ही मरीज पीजीआई पहुंचते हैं अधिकतर बीच रास्ते ही दमतोड़ देते हैं। इससे अलग जो ब्रेन हैमरेज व ब्रेन ट्यूमर के मरीज हैं, उन्हें प्राइवेट डाक्टर के पास लाखों रुपयेे में लुटना पड़ रहा है।

सीएम ने कहा था पीजीआई जैसी मिलेंगी सुविधाएं
मेडिकल कॉलेज शुरू होने के दौरान सीएम ने लोगों से कहा था कि इस मेडिकल कॉलेज में उन्हें पीजीआई जैसी सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन यहां के हालत कुछ ओर है। पीजीआई जैसी सुविधा के लिए मेडिकल कॉलेज में यूपी के साथ-साथ कैथल, पानीपत कुरूक्षेत्र आदि जिलों से मरीज आते हैं लेकिन उन्हें यहां से निराश होकर जाना पड़ता है।

प्राइवेट अस्पताल में लाखों रुपये देने पड़ते हैं न्यूरो सर्जन को
प्राइवेट अस्पतालों में न्यूरो सर्जन को हेड इंजरी के लाखों रुपये देने पड़ते हैं। इससे अलग प्राइवेट डॉक्टर की फीस 300 से 400 रुपये है ओर ऑपरेशन पर कई लाख रुपये खर्च आता है। मेडिकल कॉलेज में न्यूरो सर्जन न होने के कारण मरीजों को उन प्राइवेट डाक्टरों के पास जाना पड़ रहा है, लेकिन जिन मरीजों के पास रुपये नहीं हैं वे चंडीगढ़ और रोहतक पीजीआई में धक्के खा रहे हैं।
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मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की सेंक्शन के लिए एक साल से पत्र भेजा हुआ है अभी वहां से कोई जवाब नहीं मिला है। इस लिए अब कांट्रेक्ट बेस पर न्यूरो सर्जन रखा जाएगा ताकि मरीजों को रेफर ना किया जा सके।
-डॉ. सुरेंद्र कश्यप, डायरेक्टर, कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज करनाल।
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