अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। होटल नूरमहल और गांव बुढ़ा खेड़ी के बीच नें लाइसेंस शुदा रियल एस्टटे कंपनी द्वारा काटी गई कॉलोनी में सपनों का घर बनाने के फेर में शहर के करीब 400 लोग अब न्याय के लिए एकजुट हुए हैं। रविवार को करीब 400 पीड़ित लोग एकत्रित हुए और सभी ने अपनी-अपनी बात रखी। इस दौरान एनसीएलटी की ओर से नियुक्त किए गए ऑर्बिटेटर मनोज कुमार भी प्लॉट धारकों के बीच पहुंचे और सभी से अपील की कि वे अपने अपने क्लेम डालें, ताकि कंपनी के खर्च और प्रॉपर्टी का ब्योरा निकाला जा सके। हालांकि, ज्यादातर लोगों ने ऑर्बिटेटर से दो टूक शब्दों में कहा कि हमें, कंपनी से पैसे नहीं बल्कि प्लॉट चाहिए, ताकि वे अपना घर बना सकें।
बता दें कि वर्ष 2011 में सोनी रिलेटर्स प्रा. लिमिटेड की ओर से 55 एकड़ में कॉलोनी काटी गई। इससे पहले, गांव बुढ़ा खेड़ा के ही कुछ लोगों के नाम पर डायरेक्टर टाउन एंड प्लानिंग की ओर से बाकायदा लाइसेंस लिया गया। कंपनी द्वारा यहां पर शहर के करीब 400 लोगों को प्लॉट बेचे गए। शहरवासियों का कहना है कि कंपनी द्वारा दावा किया गया था कि वे वर्ष 2014 तक यहां पर पजेशन दे देंगे और वर्ष 2016 तक डेवलेप कर देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका और पजेशन के ऑफर लेटर के बहाने सभी प्लॉट धारकों से बकाया राशि भी जमा करा ली गई। प्लॉटधारकों का दावा है कि करनाल के 400 लोगों के करीब 170 करोड़ रुपये इस प्रोजेक्ट में फंस गए हैं। एक तरफ कंपनी का कोई भी अधिकारी नहीं मिल रहा है, दूसरा उनके पास आज तक पजेशन नहीं होने के कारण रजिस्ट्री भी नहीं हो सकी है।
हमें केवल और केवल प्लॉट चाहिए
कुंजपुरा रोड स्थित एक होटल में हुई बैठक में पीड़ित प्लॉट धारक पहुंचे। पहले सभी ने अपनी-अपनी बात रखी और आगे की रणनीति भी बनाई। करीब तीन घंटे तक लोगों ने मंथन किया। इस दौरान सभी प्लॉट धारकों ने कहा कि उन्हें कंपनी से पैसे वापस नहीं चाहिए, वे तो केवल अपना प्लॉट चाहते हैं। कृष्ण कुमार, संजीव कुमार, राकेश गुप्ता, हरिओम, प्रताप सिंह आदि ने कहा कि उन्होंने यहां पर प्लाट इसलिए लिया था, क्योंकि कंपनी द्वारा बाकायदा सरकार से लाइसेंस लेकर कॉलोनी काटी गई थी। अब अगर कंपनी फरार हो गई है तो सरकार इसे अपने अंडर लेकर प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाए। कमल सिंह, रकम सिंह, भारत ने बताया कि वह सरकार को टैक्स देने के लिए तैयार हैं, सरकार को चाहिए कि वह इसे डेवलेप करें, ताकि शहर के 400 परिवारों को छत मिल सके।
सभी प्लॉट धारकों से मांगे क्लेम
इस बैठक में एनसीएलटी (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) की ओर से नियुक्त आईआरपी (इंटेरिम रेजुलेशन प्रोफेसनल) मनोज कुलश्रेष्ठ भी पहुंचे। मनोज कुमार ने इस पूरे केस और दस्तावेजों के बारे में जानकारी दी। मनोज ने बताया कि सोनी रिलेटर्स कंपनी के खिलाफ एक फाइनेंसियल कंपनी के ट्रिब्यूनल में केस डाला हुआ है, जबकि कंपनी खुद को दिवालिया घोषित करने की अप्लीकेशन लगाई है। इसके लिए वे कंपनी की प्रॉपर्टी और लोगों के क्लेम का डाटा एकत्र करके ही इस पर कोई फैसला ले सकेंगे। कुलेश्रेष्ठ ने लोगों को आश्वस्त किया कि वे इस मामले को आगामी नौ माह में निपटा देंगे। इस दौरान ये भी बताया कि कंपनी द्वारा लोगों से हुडा ईडीसी (एक्टरनल डेवलपमेंट चार्ज), आईडीसी (इंटरनल डेवलपमेंट चार्ज) भी वसूल लिए गए, लेकिन वो पैसा कंपनी ने हुडा विभाग में भी जमा नहीं कराए, जो करीब दस करोड़ रुपये की राशि बनती है।
सीएम से मिला न्याय का आश्वासन
देर शाम को पीड़ित प्लॉट धारक पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मिले। सोनिया तलवार, मोहित कुमार, संदीप, अमित, जीसी अत्रेजा, मांगे राम एडवोकेट, रीतेश आर्य, ईश कुमार, उधम सिंह, विनोद कुमार ने सीएम को पूरा मामला बताया। इस दौरान पहले, सीएम मामले को हरेड़ा को भेजने को कहे, लेकिन बाद में कहा कि प्लॉटधारक एक कमेटी बनाएं और सोमवार को डायरेक्टर टाउन एंड प्लानिंग से मिले। सीएम ने आश्वासन दिया कि किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।