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कष्ट निवारण समिति की बैठक : अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों का अंबार, बैठक बन गई खुला दरबार

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मंत्रीजी डीईओ को और कहीं लगा दो हमें नहीं चाहिए
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक गुरुवार को बैठक न रहकर खुला दरबार बन गई। प्रशासन की ओर से भले ही पहले निर्धारित 10 मामलों को बैठक में रखा गया था, लेकिन मामलों की सुनवाई के बाद 140 से भी ज्यादा लोग अधिकारियों के खिलाफ शिकायतें करने पहुंच गए। शिकायतकर्ताओं की भीड़ ज्यादा होने के कारण पुलिस को भी व्यवस्था बनाने में दिक्कत आई। भीड़ का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक शिकायत खत्म होते ही तुरंत अगला शिकायतकर्ता राज्यमंत्री नायब सिंह सैनी के सामने पहुंच जाता। ज्यादातर शिकायतों में लोगों ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर ही सवाल उठाए।
एक मामले में तो समिति के सभी सदस्यों ने जिला शिक्षा अधिकारी सरोजबाला गुर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और राज्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मांग कर डाली कि मंत्रीजी, इस डीईओ को इस जिले से कहीं भी भेज जो, हमें इसकी जरूरत नहीं है। बैठक में काफी देर तक इसी मामले को लेकर हंगामा होता रहा। इस पर मंत्री ने भी चुप्पी साध ली, करीब 10 मिनट के बाद दोबारा से बैठक चली।
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गुरुवार को राज्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में पंचायत भवन में आयोजित जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक शुरू होते ही शिकायतकर्ता अधिकारियों के खिलाफ बोलने लगे। एक-एक बाद 10 मामले सामने आए, इन सभी में जिले के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए। थानेदारों से लेकर, बीडीपीओ और शिक्षा विभाग के खिलाफ शिकायतें की गई।
खास बात यह है कि अधिकारी बिना तैयारी के ही बैठक में पहुंच गए और जब मंत्री ने संबंधित मामले की जानकारी मांगी तो वे बगले झांकने लगे। 10 मामलों को सुनने के बाद अचानक भवन में काफी संख्या में लोगों की भीड़ जुट गई और पुलिस ने भीड़ को कंट्रोल किया। करीब 140 लोगों ने मंत्री को अपनी व्यथा सुनाई। इनमें भी ज्यादा अधिकारियों से ही परेशान मिले और आरोप लगाये कि निष्पक्ष प्रकार से मामलों में कार्रवाई नहीं हो रही है।
इस पर मंत्री ने सभी अधिकारियों को चेताया कि वे लोगों की शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाएं। गौरतलब है कि एक माह पहले हुई बैठक में भी खुद मंत्री ने ज्यादा शिकायतकर्ता आने पर जिला प्रशासन के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में 10 मामले रखे गए, जिनमें से 7 मामलों का मंत्री ने समाधान किया और अन्य 3 मामलों को अगली बैठक के लिए लंबित कर दिया। इसके अलावा, राज्यमंत्री ने दर्जनों अन्य लोगों की शिकायतें भी सुनी, जिनके समाधान के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए।

हमारी तो खड़ी फसल खराब हो रही है, अफसर सुनते नहीं हैं
मंत्री जी, बरसाती पानी के कारण हर साल हमारी हजारों एकड़ फसल खराब हो रही है, हमें तो पशुओं के लिए तूड़ी भी नजदीक के गांव से खरीदनी पड़ती है। सिंचाई विभाग के अधिकारी हमारी अनदेखी कर रहे हैं, बरसाती पानी की निकासी के लिए कोई स्थायी समाधान नहीं करते। राज्यमंत्री ने उपलाना, जबाला व ठरी गांव के किसानों की इस दिक्कत को सुनकर तुरंत सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी कीमत पर इन गांव के खेतों में बरसाती पानी की निकासी का प्रबंध किया जाए, किसानों को किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं आनी चाहिए।
यह मिला जवाब : सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता ने बताया कि इसके स्थायी समाधान के लिए नहर पर एस्कैप बनाया जाएगा, इसकी प्रपोजल विभाग को भेजी गई है। इसके साथ ही गांव जबाला में बीएमएल नहर पर 31 लाख रुपये की लागत से इंलेट लगाए जाएंगे, ताकि गेट बंद होने पर भी पंपों के माध्यम से बरसाती पानी खेतों से निकाला जा सकें।

डीईओ के खिलाफ खोला मोर्चा
एक अन्य मामले में उत्तम चंद की शिकायत थी कि वह दयानंद मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल करनाल में लिपिक के पद से सेवानिवृत्त हो गया है। अब वह स्कूल बंद हो गया है, परंतु स्कूल प्रबंधन द्वारा उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली राशि नहीं दी गई है, जोकि स्कूल प्रबंधन द्वारा 25 प्रतिशत बनती है। इस पर संज्ञान लेते हुए राज्यमंत्री ने जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए कि इस मामले पर उचित कार्यवाही करके पीड़ित को न्याय दिलाया जाएं। इस दौरान सदन में बैठे कमेटी के सभी सदस्य खड़े हो गए और डीईओ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। सभी ने कहा कि मंत्रीजी इस डीईओ को यहां से बदल दो, इनका व्यवहार और कार्यशैली ठीक नहीं है। कविंद्र राणा और अन्य ने भी आरोप लगाया कि अगर कोई शिकायत करने जाता है तो डीईओ मैडम केस दर्ज कराने की धमकी भी देती हैं।

यह मिला जवाब मंत्री ने इस मामले में जब डीईओ सरोजबाला गुर से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उत्तम चंद ने अदालत में केस कर रखा है, इस पर उत्तम चंद ने बताया कि उसने कोई केस नहीं कर रखा। हालांकि, डीईओ ने इन सभी आरोपों का खंडन किया। काफी देर तक इसी मामले में हंगामा होता रहा।

पुलिस ने हत्या आरोपियों को छोड़ दिया
पीर बड़ौली निवासी रवि कुमार ने शिकायत के माध्यम से आरोप लगाया कि गांव के कुछ लोगों ने उनके खेतों में गोली चलाई थी, जिसमें पिता ओमप्रकाश की मृत्यु हो गई थी, पुलिस ने कुछ दोषियों पर कार्रवाई की। परंतु कुछ ऐसे दोषियों को छोड़ दिया है, जिनकी मिलीभगत से यह सारा प्रकरण हुआ। इस दौरान पुलिस कार्रवाई से असंतुष्ट ओमप्रकाश की पत्नी की आंखों में आंसू निकल आए।
मामले में पुलिस उपाधीक्षक राजीव कुमार ने बताया कि जिन व्यक्ति का नाम प्रार्थी ले रहे हैं, जांच में वह दोषी नहीं पाए गए। इसके बावजूद भी राज्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रार्थी की संतुष्टि के लिए दोबारा जांच करने के आदेश दिए और इस मामले को पेंडिंग रखा।

वहीं, दूसरे मामले में फरीदपुर वासी मनोज कुमार ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों द्वारा उनका ट्रैक्टर चोरी किया गया और उनके पिता की हत्या की गई, जिसकी एफआईआर घरौंडा थाना में दर्ज है। पुलिस द्वारा अभी तक दोषियों को गिरफ्तार नहीं किया है।
जांच रिपोर्ट में बताया कि इस मामले में कई एजेंसियों द्वारा जांच की गई है और दोषियों के खिलाफ भी कार्रवाई भी की गई है। इसके बावजूद भी पुलिस अधीक्षक ने राज्यमंत्री को आश्वासन दिलाया कि इस बार वह स्वयं अपनी देखरेख में जांच करेंगे।

गगसीना निवासी चरण सिंह ने जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक के माध्यम से मांग की है कि उनके गांव के स्टेडियम की तेज हवा के कारण दीवार गिर गई है, उसे दोबारा बनवाया जाएं। इस पर बीडीपीओ घरौंडा ने मंत्री को बताया कि अगले 10 दिनों में इस दीवार के निर्माण कार्य पर कार्य शुरू हो जाएगा, इसके लिए एक लाख 20 हजार रुपये का एस्टिमेट बनाया गया है।

सरपंच के खिलाफ गरजे ग्रामीण, दिखाई वीडियो
बैठक में राज्यमंत्री के सामने ब्रास गांव के प्रवेश, जसविंद्र सिंह और सुरेंद्र सिंह आदि ने सरपंच द्वारा घोटाला करने का मामला रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि गांव के सरपंच द्वारा निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया और सरकार के पैसों का दुरुपयोग किया गया। इस पर मंत्री ने संज्ञान लेते हुए एसडीएम करनाल को निर्देश दिए कि इसकी दोबारा से हर पहलू पर जांच करे तथा दोषी के खिलाफ कार्यवाही की जाए। मंत्री ने मामले की जांच के आदेश दिए। वहीं ग्रामीणों ने उनको वीडियो भी दिखाई गई।


सीएम दरबार में भी नहीं हुई सुनवाई तो समिति की बैठक में पहुंचा
कष्ट निवारण समिति की बैठक में ऐसे भी लोग पहुंचे जो एक माह पहले लगे सीएम दरबार में शिकायत करने पहुंचे थे और समाधान के आश्वासन मिले थे, लेकिन एक माह बीतने पर भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। भैणी खुर्द गांव के वेदपाल ने मंत्री को बताया कि आज तक बीडीपीओ ने गांव से अवैध कब्जा खाली नहीं कराया है, जबकि सीएम ने एक सप्ताह में आदेश दिये थे। इस दौरान मंत्री ने बीडीपीओ नीलोखेड़ी को तलब किया और उनसे पूछताछ की। बीडीपीओ ने बताया कि इस मामले में दूसरी पार्टी अदालत में चली गई और स्टे ले आई। हालांकि, वेदपाल ने बीडीपीओ पर दूसरी पार्टी की मदद करने का आरोप लगाया।

पति चला गया विदेश, नहीं करता बात
समिति की बैठक में घरौंडा से आई महिला ने बताया कि दो साल पहले उसकी बहादुरगढ़ के लड़के से शादी हुई थी, शादी के बाद वह उसे कुछ दिन के लिए आस्ट्रेलिया ले गया और बाद में वापस भेज दिया। अब मेरे पास एक साल की बेटी है, लेकिन अब डेढ़ साल से उसका पति न तो वापस आया और न ही उससे बात कर रहा है। महिला ने कहा कि वह अपने पति के साथ रहना चाहती है। इस पर मंत्री ने पुलिस को आदेश दिये कि मामले की जांच की जाए और महिला को न्याय दिलाया जाए।
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ये रहे मौजूद
इस अवसर पर असंध विधायक सरदार बख्शीश सिंह विर्क, नीलोखेड़ी विधायक भगवानदास कबीरपंथी, मेयर रेनू बाला गुप्ता, भाजपा जिला अध्यक्ष जगमोहन आनंद, महामंत्री योगेंद्र राणा, गैर सरकारी सदस्य अशोक मदान, कविंद्र राणा, सरदार गुरबख्श लाडी, जनक पोपली, जगदेव पाढ़ा, दर्शन सिंह सहगल, ईश्वर गुप्ता, सतीश राणा, मेहम सिंह धीमान, रणवीर गोयत, विनोद कुमार, दलबीर बसताडा, बृजलाल ठक्कर, गुलाब मुनक, कृष्ण भुक्कल, सुदर्शन जुनेजा, डॉ. सुखबीर संधू, पुलिस अधीक्षक जेएस रंधावा, एसडीएम करनाल नरेंद्र मलिक, घरौंडा एसडीएम इमरान रजा, इंद्री एसडीएम प्रदीप कौशिक, नगराधीश इशा कांबोज सहित कई अधिकारी उपस्थित रहें।
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