एनएचएम कर्मियों की हड़ताल जारी : चौथे दिन भी नहीं किया ज्वाइन, विभाग ने छह कर्मचारियों को किया बर्खास्त
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। पिछले चार दिन से जारी एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल शनिवार को भी जारी रही। हालांकि, प्रदेश सरकार की ओर से दोपहर तक कर्मचारियों को ड्यूटी ज्वाइन करने का मौका दिया गया, लेकिन कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं गए। इतना ही नहीं खुद सीएमओ डा. योगेश शर्मा धरना स्थल पर पहुंचे और धरना समाप्त करने की अपील की, लेकिन कर्मचारियों ने उनकी बात नहीं मानी। देर शाम स्वास्थ्य विभाग की ओर से फ्लीट मैनेजर गोपाल शर्मा समेत एंबुलेंस सेवा से जुड़े छह कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया। विभाग का कहना है कि अगर कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं आए तो बर्खास्त कर्मचारियों की संख्या बढ़ सकती है। वहीं, दूसरी ओर से कर्मचारियों की हड़ताल से पीएचसी व सीएचसी पर सेवाएं बाधित चल रही हैं, सबसे ज्यादा असर एंबुलेंस सेवा पर है, हालांकि विभाग ने एक प्राइवेट एजेंसी से 10 प्राइवेट चालक हायर किये हैं और काम चलाया जा रहा है। दूसरी ओर कर्मचारियों ने चेताया है कि उनकी हड़ताल 11 दिसंबर तक चलेगी।
बता दें कि जिला स्वास्थ्य विभाग में एनएचएम के कुल 492 कर्मचारी हैं, इनमें से 420 कर्मचारी पिछले चार दिन से हड़ताल पर हैं और सीएमओ कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे हैं। मांगें मनवाने को लेकर कर्मचारी सरकार से आर पार करने के मूड में हैं। वहीं, सरकार भी पीछे हटने को तैैयार नहीं है। हालांकि, जिला प्रशासन की ओर से हड़ताली कर्मचारियों को दोपहर तक ड्यूटी ज्वाइन करने का मौका दिया गया, लेकिन कर्मी ड्यूटी पर नहीं आए। देर शाम सीएमओ डा. योगेश शर्मा ने फ्लीट मैनेजर गोपास शर्मा समेत एंबुलेंस सेवा से जुड़े छह कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अन्य कर्मचारियों पर भी बर्खास्तगी की तलवार लटकी हुई है। आदेश मिलते ही इनको हटाकर नये कर्मचारी रखे जाने की योजना है। इस बारे में सीएमओ डा. योगेश शर्मा ने छह कर्मचारियों की बर्खास्तगी की पुष्टी करते हुए बताया कि कर्मचारियों को नौकरी पर आने का मौका दिया गया था, लेकिन वे नहीं आए। अन्य कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है। डा. शर्मा ने बताया जिन छह कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया है वे निजी एंबुलेंस चालकों को भी गाड़ी चलाने से रोकने का प्रयास कर रहे थे, जो गलत है।
मरीजों को लाने ले जाने में आ रही दिक्कत
कर्मचारियों की हड़ताल से सबसे ज्यादा परेशानी गांवों व कस्बों से आने व जाने वाले मरीजों को आ रही है। गर्भवती व घायल लोगों के लिए एंबुलेंस सेवा निशुल्क है, लेकिन हड़ताल के चलते लोगों को या तो निजी एंबुलेंस करनी पड़ रही है या फिर दूसरे वाहन। हालांकि, इसके लिए उन्हें कीमत चुकानी पड़ रही है। शनिवार को हड़ताली कर्मचारियों ने निजी एंबुलेंस संचालकों से भी समर्थन मांगा। हालांकि, निजी चालकों ने मांगों का समर्थन किया है, लेकिन वे वाहन चला रहे है। बता दें कि घरौंडा, इंद्री, असंध, नीलोखेड़ी में एक-एक एंबुलेंस है, वहीं करनाल शहर में तीन चालक हैं। इसके अलावा, दस निजी चालक सेवाएं दे रहे हैं।