- बहनों के साथ भाइयों ने भी किया सफर, सात हजार किलोमीटर ज्यादा चलीं 148 बसें, 50 से अधिक अतिरिक्त फेरे लगे
गगन तलवार
करनाल। प्रदेश सरकार की ओर से हर बार रक्षाबंधन पर बहनों को निशुल्क सफर की सुविधा देकर किराये के रूप में बोझ उठाया जाता था, लेकिन इस साल पहली बार ऐसा हुआ है कि निशुल्क सफर के बावजूद रोडवेज के करनाल डिपो का राजस्व सामान्य दिनों से 10 प्रतिशत ज्यादा बढ़ा है। यानी बहनों के साथ-साथ भाइयों ने भी बसों में सफर किया है। महिलाओं से ज्यादा पुरुषों की संख्या रही, तभी किराया भी सामान्य दिनों से ज्यादा प्राप्त हुआ।
आंकड़ों पर नजर डालें तो करनाल डिपो का सामान्य दिनों में करीब 12 लाख रुपये का राजस्व टिकट से प्राप्त होता है। जोकि बुधवार को रक्षाबंधन के दिन 13.5 लाख रुपये से अधिक रहा। डिपो की 151 बसें सामान्य दिनों में 40 हजार किलोमीटर का सफर तय करती हैं। जबकि त्योहार के दिन इन बसों ने 49 हजार किलोमीटर तक की दौड़ लगाई। डीआई रविशंकर के अनुसार, इस सात हजार किलोमीटर को बसों ने 50 से ज्यादा अतिरिक्त फेरे लगाकर पूरा किया है। हालांकि भीड़ के कारण यात्रियों को परेशानी भी काफी उठानी पड़ी। पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं को भी खड़े होकर सफर करना पड़ा। युवा तो बसों के पीछे या खिड़की पर भी लटके दिखाई दिए। बुधवार के अलावा वीरवार को भी ऐसी ही स्थिति रही।
बसों ने कराया घंटों इंतजार
वीरवार को भी काफी लोगों ने रक्षाबंधन का पर्व मनाया। ऐसे में कई बहनों ने वीरवार को सफर किया। जबकि बुधवार को जो बहनें निशुल्क सफर करके पहुंची थी, उनमें से कई महिलाओं ने वीरवार को अपने घर की वापसी की। वीरवार को भी शाम तक करीब 12 लाख रुपये का राजस्व रहा। जबकि भीड़ के कारण परेशानी भी उठानी पड़ी। कई मार्गों पर बसें न मिलने से बहनों को इंतजार करना पड़ा। बस अड्डे के अलावा राजमार्ग के चौराहों पर भी सवारियां बसों के इंतजार में खड़ी दिखाई दी। कई बसें फ्लाईओवर के ऊपर से ही गुजर गईं।
वर्जन
करीब सात हजार किलोमीटर का सफर बसों ने अतिरिक्त तय किया है। सामान्य दिनों से ज्यादा राजस्व भी प्राप्त हुआ है। रक्षाबंधन के चलते तीनों दिन बहनों को बेहतर सुविधा देने का प्रयास किया गया। निशुल्क सफर के दौरान टिकट काटने या अभद्र व्यवहार की कोई शिकायत नहीं मिली।
- कुलदीप सिंह, जीएम, रोडवेज