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नवरात्र के दूसरे दिन की मां ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना

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worship - फोटो : Kaithal
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नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना कर विश्व भर में फैली महामारी जल्द से खत्म होने की प्रार्थना की। छोटी मंदिर देवी पुजारी पंडित विनायक भारद्वाज शर्मा ने बताया कि मां ब्रह्मचारिणी के नाम का अर्थ-ब्रह्म मतलब तपस्या और चारिणी का अर्थ आचरण करने वाली देवी होता है। मां ब्रह्मचारिणी के हाथों में अक्ष माला और कमंडल सुसज्जित हैं। अगर मां का सच्चे मन से पूजन किया जाए तो व्यक्ति को ज्ञान सदाचार लगन, एकाग्रता और संयम रखने की शक्ति प्राप्त होती है।
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सुबह व शाम के समय मंदिरों में उमड़ी रही श्रद्धालुओं की भीड़- मंदिरों में सुबह से लेकर शाम तक श्रद्धालुओं का दर्शन करने के लिए तांता लगा रहा। महामारी को देखते हुए श्रद्धालुओं ने दूर से ही माता के दर्शन किए और माथा टेका। इससे पहले मंदिर के प्रवेश द्वार पर ही श्रद्धालुओं के हाथों के सैनिटाइज किया जा रहा था। ताकि महामारी के प्रभाव कम हो सके और दूसरों को भी बचाया जा सके। इसके साथ पुजारी ने सभी श्रद्धालुओं से घंटी न बजाने की अपील की। श्रद्धालुओं ने माता के जयकारों के साथ फल, फूल व लाल रंग की चुनरी चढ़ाकर मैया के दर्शन किए वह अपने परिवार व देश की सुख समृद्धि की कामना की।
नवरात्र पर्व के तहत रविवार को दूसरे नवरात्रे के उपलक्ष्य में श्रद्धालुओं ने मां ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना कर मंगल कामना की। नवरात्रों से संबधित सामान खरीदने वाले श्रद्धालु प्रसाद, आलू, कुट्टूू के आटे की खरीददारी कर रहे है। नवरात्रों को लेकर दुर्गा मंदिर, प्राचीन शिव मंदिर, भद्रकाली मंदिर, बाबा बहादुर बण मंदिर में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर मां दुर्गा के स्वरूप ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना की। श्रद्धालु मंदिरों में जयकारे लगाते हुए पहुंचे। मां भगवती के दर्शनों के लिए महिलाओं की सं या अधिक रही।
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