संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। पुलिस लाइन में सोमवार को पुलिस एवं कारागार अधिकारियों की तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला शुरू हुई। इसका उद्देश्य ‘ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 एवं नियम, 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों को प्रशिक्षित करना है।
प्रशिक्षण सत्र में वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद खुरानिया ने अधिनियम की धाराओं, न्यायिक दृष्टिकोण, तथा ट्रांसजेंडर व्यक्तियों से संबंधित शिकायतों के संदर्भ में पुलिस प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णयों के उदाहरणों के माध्यम से अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का मार्गदर्शन दिया।
गौरतलब है कि यह अधिनियम 10 जनवरी 2020 से प्रभावी हुआ था, जबकि इसके नियम 25 सितंबर 2020 से लागू हुए। इससे पहले वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी बनाम भारत संघ मामले में केंद्र और राज्य सरकारों को ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए सक्रिय कदम उठाने के निर्देश दिए थे। इन इस अधिनियम में भेदभाव के खिलाफ सुरक्षा और समानता के अधिकार शामिल हैं।
ट्रांसजेंडर अधिकार वे अधिकार हैं जो ट्रांसजेंडर लोगों को समानता, गरिमा और गैर-भेदभाव के साथ जीने के लिए आवश्यक हैं। इसमें कानूनी मान्यता, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवा, और सामाजिक सुरक्षा तक पहुंच शामिल है।