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महिलाओं ने डीसी के समक्ष रखीं समस्याएं

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10-कैथल। कॉफी विद कलैक्टर कार्यक्रम में विभिन्न स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों से बात करते हुए डी? - फोटो : Kaithal
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कैथल। जिला प्रशासन की नई मुहिम ‘कॉफी विद कलेक्टर’ कार्यक्रम में बृहस्पतिवार को दोपहर डीसी डा. संगीता तेतरवाल ने स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों के साथ उनकी समस्याओं पर चर्चा की। इस दौरान गांव बाकल में दरी बनाने का काम कर रही मन्नत ग्रुप की सदस्यों ने अपनी बनाई हुईं दरियां दिखाईं। डीसी ने आमदनी के बारे में पूछा तो महिलाएं बोलीं, आमदनी कम है। समस्या पर डीसी ने उन्हें पानीपत से कच्चा माल उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए।
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ये महिलाएं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत कार्य में संलग्न हैं। महिलाओं ने कहा कि उनके बनाए सामान की मार्केट नहीं है। गांव में जो दरियां तैयार की जाती हैं, वह गांव में ही बेच दी जाती है। डीसी ने मशीन से दरी बनाने के संबंध में पूछा तो उन्होंने कहा कि मशीन से भी दरी बना लेंगे, लेकिन हाथ से दरी बनाने का काम जारी रखेंगे। महिलाओं ने बताया कि एक जोड़े की कीमत महज 2500 रुपये है। सदस्य अधिक होने के कारण यह कमाई काफी कम है। यदि हमें कच्चा माल मिल जाए तो हम अच्छा काम कर सकते हैं। डीसी ने एनआरएलएम में कार्यरत मनोज कुमार को निर्देश देते हुए कहा कि स्वयं सहायता समूह को उनकी जरूरत के अनुसार कच्चा माल उपलब्ध करवाएं। इसके लिए वे पानीपत से भी संपर्क कर सकते हैं।
मैडम जी कच्चा माल कोनी मिलदा
खेड़ी शेरखां कलायत खंड में गमले और गुलदस्ते बनाने वाले ग्रुप की महिला सदस्यों के बनाए उत्पादों की सराहना करते हुए उपायुक्त ने कहा कि ये देखने में बहुत अच्छे हैं। महिलाएं डीसी से बोलीं कि ‘मैडम जी कच्चा माल तो कोनी मिलदा अर न बेचने का बाजार।’ इस पर फिर से डीसी ने अधिकारियों को कहा कि कच्चा माल उपलब्ध करवाने में समूहों की सहायता करें और बाजार की संभावनाएं भी तलाशे के निर्देश दिए। एलडीएम ने डीसी को बताया कि कैथल में सपना कालड़ा, ममता, अक्षरा गुप्ता और प्रिया रानी को 10 लाख रुपये का ऋण दिया जा चुका है।
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