राजौंद। कैथल रोड स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में रविवार को महिला सशक्तिकरण दिवस मनाया। कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी बहनें आस-पास के नीमवाला, रोहेड़ा इत्यादि गांव में जाकर महिलाओं को जागरूक कर नारी नरक का द्वार नहीं सिर का ताज है। नारी अबला नहीं सबला है। शक्ति स्वरूपा है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और नारी के उत्थान के संकल्प के साथ उसे समाज में खोया सम्मान दिलाने, भारत माता, वंदे मातरम् की गाथा को सही अर्थों में चरितार्थ करने के लक्ष्य से मना रही है।
इस दौरान ब्रह्माकुमारी आशा बहन ने कहा कि नारी परिवार की धूरी है। वह घर को स्वर्ग बनाने वाली और बच्चों को सुसंस्कारित करने वाली है। आदिकाल से नारी पूज्यनीय और वंदनीय रही है। आजकल वह भले ही आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से सशक्त हुई है, लेकिन अध्यात्म से दूर होने के कारण उसके अंदर सहनशीलता, नम्रता और मधुरता जैसे सद्गुणों की कमी हो गयी है।
आध्यात्मिकता को अपनाने से हमें समस्याओं का सामना करने की शक्ति मिलती है। बेटों को महिलाओं की इज्जत करना सीखलाएं। जब घर में वह महिलाओं की इज्जत करना सीखेंगे तब वह बाहर जाकर महिलाओं का सम्मान करेंगे। उन्होंने कहा कि महिलाओं के बिना संसार की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। फिर भी भारतीय समाज में महिलाओं को दूसरा दर्जा दिया जाता है इसके लिए महिलाएं स्वयं ही दोषी हैं।
हम यह न सोचें कि बेटों से वंश आगे चलेगा क्योंकि यदि बहु ही नहीं होगी तो सृष्टि में उत्पत्ति कैसे होगी? घर में बेटी पैदा होने पर बहु को तंग न करें। हम बदलेंगे तो जग बदलेगा। कार्यक्रम के अंत में राजयोग का अभ्यास करवाया।