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Kaithal News: परिवार नियोजन में महिलाएं आगे, पुरुष अब भी हिचकिचा रहे

Sat, 29 Nov 2025 12:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। घरेलू जिम्मेदारियों के साथ-साथ परिवार नियोजन का बोझ भी महिलाओं पर अधिक है। जिले में अप्रैल 2025 से अब तक 50 पुरुषों ने ही नसबंदी करवाई है, जबकि 4,606 महिलाओं ने परिवार नियोजन अपनाया। इनमें 1,101 महिलाओं ने नलबंदी और 3,505 महिलाओं ने कॉपर-टी के माध्यम से परिवार नियोजन में अपनी भूमिका निभाई है।

लंबे समय से जागरूकता अभियान चलाए जाने के बावजूद पुरुषों में परिवार नियोजन को लेकर मिथक और गलत धारणाएं अब भी हावी हैं। सरकार पुरुषों को प्रोत्साहित करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चला रही है और नसबंदी करवाने वाले महिला एवं पुरुष दोनों को प्रोत्साहन राशि भी प्रदान करती है। पहले जहां लोग दो या तीन बच्चों के बाद नसबंदी करवाते थे, वहीं अब एक बच्चे के बाद भी लोग यह कदम उठा रहे हैं। महिलाओं की जागरूकता बढ़ रही है, लेकिन पुरुषों की भागीदारी काफी कम है।
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स्वास्थ्य विभाग द्वारा राष्ट्रीय परिवार कल्याण कार्यक्रम के तहत हाल ही में एक विशेष अभियान शुरू किया गया है, जो 19 दिसंबर 2025 तक चलेगा। इसी अभियान के तहत शुक्रवार को गुहला नागरिक अस्पताल में लगाए गए कैंप में 5 महिलाओं और 3 पुरुषों ने नसबंदी करवाई। इस पखवाड़े का मुख्य उद्देश्य पुरुषों को नसबंदी के प्रति जागरूक करना है।

जिला नोडल अधिकारी प्रीति सिंघला ने बताया कि पुरुष नसबंदी कराने वाले लाभार्थियों को 2,000 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाती है। बावजूद इसके पुरुष आगे नहीं आ रहे हैं। अप्रैल से केवल 50 पुरुषों ने नसबंदी करवाई है, जबकि महिलाओं की संख्या ज्यादा है। पुरुषों में यह भ्रांति है कि नसबंदी के बाद शारीरिक कमजोरी आ जाती है, जबकि यह पूरी तरह गलत है। पुरुषों की नसबंदी बिना चीरा और टांके के होती है तथा उसके बाद वे सामान्य रूप से काम कर सकते हैं। इसलिए चल रहे विशेष पखवाड़े का पुरुषों को लाभ उठाना चाहिए।
महिलाओं पर अधिक बोझ, जबकि पुरुषों के लिए प्रक्रिया सरल

महिलाओं की नसबंदी के लिए चीरा लगाना पड़ता है और इसके बाद उन्हें 8 से 10 दिन तक आराम की सलाह दी जाती है। दूसरी ओर, पुरुष नसबंदी एक बेहद सरल और सुरक्षित प्रक्रिया है, जिसमें किसी तरह का चीरा या टांका नहीं लगता। प्रक्रिया के कुछ ही समय बाद पुरुष सामान्य रूप से अपना कामकाज कर सकते हैं। इसके बावजूद भ्रांतियों के चलते पुरुष परिवार नियोजन में पीछे हैं।
हिचकिचाहट के ये हैं कारण
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भारत में परिवार नियोजन को अक्सर महिलाओं का कर्तव्य माना जाता है। एक-तिहाई से अधिक पुरुषों का मानना है कि गर्भनिरोधक महिलाओं का काम है और उन्हें चिंता नहीं करनी चाहिए।

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यह भ्रांति है कि नसबंदी कराने से मर्दानगी, यौन प्रदर्शन, या शारीरिक कार्यक्षमता कम हो जाएगी। डॉक्टरों ने इन सभी धारणाओं को पूरी तरह गलत बताया है, फिर भी ये डर बने हुए हैं।

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पुरुषों को पुरुष नसबंदी जैसी सरल और सुरक्षित प्रक्रिया के बारे में जानकारी नहीं होती है।

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जागरूकता फैलाने वाले अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कार्यकर्ता-आशा, एएनएम महिलाएं हैं, जिससे पुरुष इन मुद्दों पर खुलकर बात करने में सहज महसूस नहीं करते हैं।
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पुरुष नसबंदी में पिछड़ने का मुख्य कारण कमजोरी आने, वैवाहिक जीवन प्रभावित होने जैसी फैली भ्रांतियां हैं। स्वास्थ्य विभाग पुरुषों और महिलाओं दोनों को हर महीने परिवार नियोजन के प्रति जागरूक कर रहा है। पुरुष नसबंदी अधिक सुरक्षित होती है और इसमें किसी प्रकार का दुष्प्रभाव नहीं होता। एनएसवी तकनीक में न तो चीरा लगता है और न ही टांके, जबकि महिलाओं को नलबंदी के दौरान दर्द का सामना करना पड़ता है।

-डॉ. रेनू चावला, सीएमओ
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