संवाद न्यूज़ एजेंसी
ढांड। गांव चुहड़ माजरा के ग्रामीणों ने गुरु ब्रह्मानंद जयंती पर गांव का नाम बदलकर ब्रह्मानंद माजरा रखने की मुख्य मंत्री की घोषणा का कड़ा विरोध किया है। वीरवार को सुभाष नंबरदार की अध्यक्षता में हुई 36 बिरादरी के लोगों की पंचायत में सभी वर्गों के लोगों ने विचार रखे। पंचायत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि गांव का नाम किसी भी सूरत में बदला नहीं जाएगा।
ग्रामीणों ने कहा कि सरपंच द्वारा मुख्यमंत्री के समक्ष गांव का नाम बदलने का मांग पत्र देने से पहले ग्राम सभा की बैठक बुलानी चाहिए थी। यदि ग्राम सभा में यह प्रस्ताव रखा जाता और ग्रामीण एकमत से सहमति देते, तभी सरपंच को मुख्यमंत्री के समक्ष इस विषय को रखने का अधिकार बनता लेकिन ग्राम सभा की अनुमति के बिना यह मांग पत्र किस आधार पर दिया गया, यह बात ग्रामीणों की समझ से परे है।
विचार-विमर्श के बाद पंचायत में यह निर्णय लिया गया कि 20 सदस्यों की एक कमेटी बनाई जाएगी। यह कमेटी सबसे पहले सरपंच से गांव का नाम बदलने के प्रस्ताव को लेकर स्पष्टीकरण लेगी। इसके बाद सरपंच की अध्यक्षता में उपायुक्त महोदय से मिलकर ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कर गांव का नाम चुहड़ माजरा ही रखने की मांग रखी जाएगी। सुभाष नंबरदार ने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो शीघ्र ही मुख्यमंत्री से मिलकर भी उन्हें ग्रामीणों की भावनाओं से अवगत कराया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि जितनी आस्था गुरु ब्रह्मानंद में है, उतनी ही गहरी आस्था चुहड़ साध में भी है, जिनके नाम पर गांव की स्थापना हुई। उन्होंने कहा कि चुहड़ साध कोई साधारण व्यक्ति नहीं थे और गांव की पहचान उनसे जुड़ी हुई है। इस प्रकार गांव का नाम बदलना न केवल परंपरा के खिलाफ है, बल्कि साधु-संतों के सम्मान के भी विपरीत है। इससे आने वाली पीढ़ियों में भी गलत संदेश जाएगा।
चुहड़ साध से पड़ा
गांव का नाम
सुभाष नंबरदार ने बताया कि लगभग 650 वर्ष पूर्व इस गांव की धरती पर बने तालाब के किनारे चुहड़ साध तपस्या कर रहे थे। फरल गांव से चार-पांच बुजुर्ग चुहड़ साध की शरण में आए। उनके आशीर्वाद से यहां गांव बसा, जिसका नाम चुहड़ माजरा रखा गया। चुहड़ साध की समाधि आज भी गांव में स्थित है और समस्त ग्रामीण श्रद्धा के साथ उसकी पूजा करते हैं।
जब समस्त ग्रामीण गांव का नाम बदलने के पक्ष में नहीं हैं, तो मैं भी पूरी तरह ग्रामीणों के साथ हैं। मुख्यमंत्री से मिलकर ग्रामीणों की भावनाओं से अवगत कराया जाएगा और गांव का नाम चुहड़ माजरा ही बनाए रखने का प्रयास किया जाएगा।
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