संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। हनुमान वाटिका स्थित शिव मंदिर में सावन के उपलक्ष्य में आयोजित शिव महापुराण कथा शनिवार को आठवें दिन भी श्रद्धाभाव से जारी रही। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, विशेषकर महिलाएं, उपस्थित रहीं। पंडित विशाल शर्मा ने भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह प्रसंग का प्रभावशाली वर्णन किया। बताया कि जब शिवजी ने कामदेव को भस्म किया था तो वह कामांतक कहलाए थे।
उन्होंने बताया कि माता पार्वती, पूर्वजन्म में दक्ष प्रजापति की पुत्री सती थीं, जिन्होंने शिव का अपमान होते देख योगाग्नि में आत्मदाह कर लिया था। अगले जन्म में वे हिमवान और मैनावती की पुत्री पार्वती बनीं और शिव को पुनः प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की।
पंडित शर्मा ने बताया कि पार्वती की कठोर साधना से प्रसन्न होकर शिव ने विवाह के लिए सहमति दी। देवताओं ने पार्वती की सहायता के लिए कामदेव को भेजा, लेकिन शिव ने क्रोध में आकर उसे अपनी तीसरी आंख से भस्म कर दिया था। बाद में शिव ने भूत, प्रेत, योगी, नागों के संग एक अद्भुत बारात निकाली, जिसे देखकर पार्वती की माता मैनावती चिंतित हो गईं। ब्रह्मा जी की अगुवाई में यह विवाह हुआ।
इस अवसर पर नरेश, बलवंत, रिंकू, लक्की, प्रवीन, बोती, धन्नो देवी, योगेश, कमला, सुरेश, रमेश, अनिल, धर्मेंद्र सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।
सावन में भक्ति की बह रही गंगा, बढ़े श्रद्धालु
कैथल। सावन मास में भक्ति की गंगा पूरे उत्साह के साथ प्रवाहित हो रही है। शहर के प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालु जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक के लिए उमड़ रहे हैं। इधर, शिवरात्रि पर्व में अब केवल चार दिन शेष हैं। ऐसे में कांवड़ यात्रियों की आवाजाही भी तेज हो गई है। कांवड़ियों की सुविधा के लिए ढांड रोड स्थित कुरुक्षेत्र मार्ग पर कई सामाजिक संगठनों द्वारा भंडारे और विश्राम शिविर स्थापित किए गए हैं, जहां उन्हें जलपान, दवा और विश्राम की सुविधाएं मिल रही हैं। संवाद