शुक्रवार सुबह आठ बजे हुई बरसात से शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई। जिससे लोगों को काफी दिक्कतें हुईं। कॉलोनयों में खाली पड़े प्लॉटों में दो-दो फुट तक पानी जमा हो गया, जिससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। शुक्रवार को सुबह आठ शुरू हुई बारिश करीब एक घंटे तक जारी रही। इस दौरान करीब 16.50 एमएम पानी बरसा। बारिश रुकने के बाद जिले का अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं छह किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से चली हवा में 71 प्रतिशत तक नमी दर्ज की गई। दिन में बादलों के साथ बीच-बीच में धूप भी निकली, लेकिन शाम के समय भी बारिश की संभावना बनी रही।
कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिक डॉ. जसबीर ने बताया कि अगले तीन-चार दिन तक बरसात होने की कम संभावना है, लेकिन 24 जुलाई के बाद तेज बरसात हो सकती है।
इन जगहों पर हुई जलभराव की स्थिति
बरसात के बाद शहर की मुख्य सड़कों के किनारे पानी जमा हो गया। वहीं कई कॉलोनियों में भी गलियों और खाली प्लाटों में पानी भर गया। डिफैंस कॉलोनी, जनकपुरी कॉलोनी, मायापुरी कॉलोनी, जालंधरी मोहल्ला, अमरगढ़ गामड़ी, शक्तिनगर, चंदाना गेट के साथ लगती कॉलोनियां, प्रताप गेट, माता गेट व रेलवे अंडरपास सहित कई जगहों पर पानी जमा हो गया। हरियाणा सरकार में एक ओर सुधार प्रोजेक्ट के डायरेक्टर रॉकी मित्तल ने शहर में भगत सिंह चौक सहित कई कालोनियों का दौरा किया और नालों की सफाई ना होने पर जिला प्रशासन की ढुल-मुल नीतियों पर क्षोभ प्रकट किया। उन्होंने सफाई कर्मचारियों को नालों की सफाई के निर्देश जारी किए।
अमरगढ़ गामड़ी के निवासियों ने जताया रोष:-अमरगढ़ गामड़ी में निकासी न होने से गली नंबर पांच व छह के बीच बरसात का पानी जमा हो गया। गामड़ी के निवासी दित्ता राम मेहंदीरत्ता, कश्मीरी लाल सैनी, वेदप्रकाश, डॉ. रामचंद्र, लव सैनी, रमेश, मुकेश, देवेंद्र, तिलक व रमेश जांगड़ा ने बताया कि इस चौक पर करीब 15 से 20 दुकानें हैं। सीवरेज रुके होने से लाखों रुपये की लागत से बनी गली में पानी जमा हो रहा है। जब नगर परिषद चेयरर्सन के वार्ड में यह समस्या है तो शहर की अन्य कॉलोनियों में तो जलभराव होना सामान्य सी बात है। उन्होंने मांग की कि निकासी का समुचित प्रबंध करवाया जाए।
धान की फसल को लाभ
बरसात से किसानों के चेहरों पर रौनक दिखाई दी। किसान कृष्ण कुमार, रमेश, प्रदीप व दिलबाग ने बताया कि धान की फसल के लिए बरसात ठीक है, लेकिन यदि लगातार बारिश होती है तो यह फसल के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। बरसात से खेतों में पानी की आपूर्ति सामान्य हो गई है। किसानों का कहना है कि धान की फसल में 24 घंटे पानी रखना पड़ता है। अगर पानी सूख जाए तो फसल मुरझाने लगती है। पानी की ज्यादा कमी से फसल नष्ट भी हो सकती है। अब बरसात ने इस कमी को पूरा कर दिया है। इससे धान के पौधों में नमी बनी रहेगी और फसल की गुणवत्ता भी अच्छी रहेगी।