संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। ग्रामीण अंचल में आज के समय में भी घूंघट निकाल कर मतदान की प्रथा कायम है। गांव भालंग के एक बूथ पर बहुएं अपनी सासू मां के साथ घूंघट में वोट डालने पहुंची। हालांकि बहुएं ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट थीं और विदेश जाने को लेकर कोचिंग ले रही हैं। उसके बावजूद भी गांव की परंपराओं को पूरी तरह से पालन होता दिखाई दिया।
परंपरा पड़ गई मतदान पर भारी-
गांव बालू के बूथ नंबर 108 पर घूंघट की परंपरा एक महिला मतदाता पर भारी पड़ी। जब महिला अपने मत का प्रयोग करने के लिए मतदान केंद्र में पहुंची तो उसे बताया गया कि उसके नाम से तो मतदान हो चुका है। महिला के पति रघुबीर सिंह ने बताया की उनकी पत्नी का ईवीएम में 8935 पर सुमन देवी के हस्ताक्षर से वोट डाला गया जबकि उनकी पत्नि का नाम केवल सुमन है।
मतदान केंद्र के बाहर बैठे बीएलओ ने बताया कि सारा मामला घूंघट की वजह से हुआ है। और वे इस मामले को निपटाने के लिए लगे हैं।
90 की उम्र में भी पूरा जोश
गांव मटौर के बूथ नंबर 96 पर मतदान करने के लिए पहुंची 92 वर्षीय छोटी देवी ने बताया की जब से वे मतदान के योग्य हुई हैं तब से उन्होंने हर चुनाव में मतदान किया है। अब उनकी हालत ऐसी है कि वे चल नहीं पाती उसके बावजूद भी वे बाइक पर बैठ कर मतदान करने बूथ पर पहुंची। छोटी देवी ने कहा कि जो राजनीतिक दल लोगों का भला करे वोट उसी को देना चाहिए। जब पूछा कि माता आपने वोट किसको दिया तो तपाक से बोली क्यू बताऊं।
खेतों में लगे दिखे पार्टियों के टेंट
एक गांव में मतदान केंद्र के बाहर जगह न मिलने के कारण से खेतों में खड़ी ज्वार की फसल में ही टैंट लगाए थे। पार्टी के कार्यकर्ताओं का कहना था कि भारी गर्मी के कारण से उन लोगों ने खेतों में ही अपने टैंट गाड़ लिए हैं
बच्चों ने संभाली कमान
कलायत। एक गांव के बूथ पर छोटे छोटे बच्चे जिन्हें चुनाव के मायने ही नहीं पता उन्होंने कमान संभाल रखी थी। ये बच्चे अपने प्रतिनिधि को वोट देने के लिए लगातार अपील करते नजर आए।