कैथल। पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रामपाल माजरा ने कहा कि पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे से किसान वर्ग में गहरी निराशा है। माजरा ने आरोप लगाया कि किसानों के पक्ष में बेबाकी से बोलने की कीमत उन्हें अपने पद से हटकर चुकानी पड़ी।
अपने निवास स्थान पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए माजरा ने कहा कि धनखड़ लगातार किसानों के मुद्दों को सदन में उठा रहे थे। उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री से किसानों के हित में किए गए कार्यों का लेखा-जोखा मांगा था और किसान सम्मान निधि की राशि को अपर्याप्त बताया था। माजरा ने कहा कि यह स्पष्ट था कि भाजपा नेतृत्व उनकी सक्रियता से असहज था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पूर्व उपराष्ट्रपति दिनभर सदन की कार्यवाही चला रहे थे, तो अचानक शाम को उनके इस्तीफे की खबर क्यों और कैसे आई? और वह भी “स्वास्थ्य कारणों” का हवाला देकर! माजरा ने कहा कि देश आज इस चुप्पी और जल्दबाजी पर जवाब मांग
रहा है। संवाद