संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले के पोलियो के दो और खसरे के पांच संदिग्ध मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने वीरवार को इन बच्चों के सैंपल जांच के लिए दिल्ली भेजे गए हैं। 15 दिन बाद रिपोर्ट आने पर असली बीमारी की पुष्टि होगी। जनवरी से अब तक स्वास्थ्य विभाग 25 सैंपल जांच के लिए भेज चुका है और जिनमें से 23 की रिपोर्ट निगेटिव मिली व दो की रिपोर्ट अभी आनी है।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डाॅ. नवराज सिंह ने बताया कि पोलियो संदिग्ध दोनों बच्चों के तेज बुखार के साथ शरीर में कमजोरी की शिकायत के बाद बच्चों के मल के सैंपल लेकर जांच के लिए दिल्ली भेजे गए हैं। दोनों बच्चे पांच साल से कम उम्र के हैं। एक बच्चा पीएचसी देवबन व दूसरा क्योड़क पीएचसी क्षेत्र से संबंधित हैं। उनका कहना है कि 15 वर्ष तक के बच्चों में बुखार के साथ अचानक हाथ-पैर में कमजोरी या ढीलापन आने पर उसे एक्यूट फ्लैसिड पैरालिसिस का संदिग्ध मामला मानकर निगरानी की जाती है। इसके साथ ही खसरा-रूबेला के 5 संदिग्धों के सैंपल भी जांच के लिए दिल्ली भेजे गए हैं। ये रूटीन जांच प्रक्रिया का हिस्सा है। एक लाख की आबादी पर हर साल दो सैंपल लेने होते हैं।
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क्या हैं एक्यूट फ्लैसिड पैरालिसिस के लक्षण...
- बुखार के साथ अचानक हाथ-पैर में कमजोरी आना
- खासकर पैर में कमजोरी आना और चलने में परेशानी होना
- शरीर के किसी अंग में ढीलापन या ताकत कम होना
- बच्चा पहले सामान्य रूप से चलता था, लेकिन अचानक चलने में असमर्थ या कमजोर हो जाए
- कमजोरी एक या दोनों पैरों/हाथों में हो सकती है
28 से 30 जून तक एक लाख बच्चों को पिलाई गई थी पोलियो की दवा...
भारत को 2014 में पोलियो मुक्त किया जा चुका है, लेकिन उसके बावजूद बच्चों को पोलियो से सुरक्षित रखने और वायरस के दोबारा प्रसार की आशंका को रोकने के लिए नियमित टीकाकरण व पोलियो अभियान के तहत ड्रॉप पिलाई जाती है। कैथल जिले में 28 से 30 जून तक जिले के सभी 5 साल तक के एक लाख 1813 बच्चों को पोलियो रोधी दवा पिलाई गई थी और स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय समय पर ये दवा पिलाई जाती रही है।
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