संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। उपमंडल के गांव बात्ता स्थित बाबा राजपुरी मठ की जमीन और प्रबंधन को लेकर दो महंत आमने-सामने आ गए हैं। बाबा लदाना डेरा के महंत दूजपुरी ने मठ के महंत बाबा नरेश पुरी पर डेरा पर अवैध कब्जा करने और मठ की संपत्ति को निजी उपयोग में लाने के आरोप लगाए हैं। इस संबंध में वे अन्य महंतों के साथ कलायत डीएसपी कार्यालय पहुंचे और बयान दर्ज करवाए। उन्होंने बताया कि इस मामले की शिकायत पहले उपायुक्त कैथल को भी दी जा चुकी है।
महंत दूजपुरी ने आरोप लगाया कि नरेश पुरी ने सरकारी अधिकारियों से मिलीभगत कर मठ की करीब 225 एकड़ जमीन का इंतकाल अपने नाम करवा लिया, जबकि उन्हें मठ का महंत नहीं बल्कि केवल प्रबंधन देखने के लिए नियुक्त किया गया था। उन्होंने कहा कि राजस्व रिकॉर्ड में नरेश पुरी की पहचान करनाल जिले के गांव बडालवा निवासी के रूप में दर्ज है, ऐसे में वे मठ की संपत्ति अपने नाम कैसे करवा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि मठ का वास्तविक मालिक बाबा राजपुरी की समाधि और उससे जुड़े संत होते हैं, जबकि महंत केवल प्रबंधन की जिम्मेदारी निभाता है। आरोप लगाया कि मठ में स्थित लगभग 500 साल पुराने धूणे का स्थान बदल दिया गया और बाबा राजपुरी परिवार के संतों की प्रतिमाओं की जगह अन्य लोगों के चित्र लगा दिए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मठ के असली महंत बाबा सोमपुरी को वर्ष 2020 में ब्लैकमेल कर गांव से बाहर कर दिया गया था और कानूनी रूप से वही मठ के महंत हैं।
महंत नरेश पुरी बोले- सभी आरोप निराधार
वहीं बाबा राजपुरी मठ के महंत नरेश पुरी ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि करीब सात वर्ष पहले उन्हें मठ का महंत बनाया गया था और उस समय मठ पर लगभग 2.5 करोड़ रुपये का कर्ज था। उन्होंने दावा किया कि पूर्व महंत बाबा सोमपुरी मठ का सोना-चांदी और नकदी लेकर चले गए थे। उन्होंने कहा कि मठ की 225 एकड़ जमीन के इंतकाल के संबंध में बाबा सोमपुरी स्वयं एसडीएम कोर्ट में लिखित रूप से दे चुके हैं कि पूरी भूमि का इंतकाल महंत नरेश पुरी के नाम किया जाए। इसके सभी दस्तावेज वे उपायुक्त के समक्ष प्रस्तुत कर चुके हैं।
महंत दूज पुरी के नेतृत्व में कलायत डीएसपी कार्यालय में पहुंचा संत समाज