संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। शहर में लावारिस कुत्तों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि राहगीरों का सड़कों पर निकलना मुश्किल हो गया है। प्रशासनिक सुस्ती और कागजी प्रक्रियाओं के चलते कुत्ता पकड़ो अभियान शुरू होने से पहले ही ठप पड़ गया है। स्थिति यह है कि जनवरी से अब तक करीब ढाई हजार लोग कुत्तों के काटने का शिकार होकर अस्पताल पहुंच चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब भी टेंडर प्रक्रिया में उलझा हुआ है।
इनमें से लगभग 1500 लोग नागरिक अस्पताल और करीब 1000 लोग पीएचसी व सीएचसी में इलाज के लिए पहुंचे हैं। लावारिस कुत्तों की समस्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं और जिला उपायुक्त भी नगर परिषद को शीघ्र अभियान शुरू करने के आदेश दे चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही।
प्रशासन द्वारा कुत्तों को पकड़ने और उनकी नसबंदी के लिए एजेंसी के चयन की प्रक्रिया अब पूरी तरह अटक गई है, जिससे समस्या दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है।
मानकों पर खरी नहीं एजेंसी, टेंडर रद्द होने की नौबत : लावारिस कुत्ते पकड़ने के लिए सामने आई एजेंसी निर्धारित तकनीकी मानकों और शर्तों को पूरा नहीं कर पा रही है। एजेंसी के पास न पर्याप्त संसाधन हैं और न ही प्रशिक्षित स्टाफ उपलब्ध है। इन खामियों के चलते उसका टेंडर अब रद्द होने की कगार पर पहुंच गया है। यदि टेंडर रद्द होता है, तो नई प्रक्रिया शुरू करनी पड़ेगी, जिससे शहरवासियों को इस समस्या से राहत मिलने में और देरी होना तय है।
सर्वे फेल, सड़कों पर बढ़ रही कुत्तों की संख्या
नगर परिषद के एक सर्वे में शहर में करीब 5,000 आवारा कुत्तों की मौजूदगी बताई गई थी, लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक है। शहर की गलियों और मुख्य चौराहों पर कुत्तों के झुंड आम दृश्य बन चुके हैं, जो खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरा बने हुए हैं।
रात के समय दोपहिया चालकों के पीछे कुत्तों के दौड़ने से कई हादसे भी सामने आ चुके हैं। कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता भी बढ़ा दी है। सरकारी अस्पतालों में एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने वालों की लंबी कतारें लग रही हैं। औसतन प्रतिदिन 15 से 20 नए मामले दर्ज हो रहे हैं।
नगर परिषद के अधिकारियों से इस मामले में जवाब-तलब किया जाएगा कि अभियान शुरू होने में देरी क्यों हो रही है। जल्द ही कुत्तों को पकड़ने का अभियान धरातल पर उतारा जाएगा। -कपिल शर्मा, जिला नगर आयुक्त