कैथल। पास देने के नाम पर ट्रांसपोर्टर से रिश्वत का यह खेल काफी दिनों से चल रहा था। गुहला के जिस ट्रांसपोर्टर की शिकायत पर दर्ज एफआईआर के आधार पर एसडीएम कैथल अमरेंद्र सिंह मनैस को विजिलेंस अंबाला टीम ने गिरफ्तार किया है। वह ट्रांसपोर्टर दो बार दलालों को पैसे दे चुका था। तीसरी बार जब दलालों ने दिसंबर माह की रिश्वत के पास के लिए ट्रांसपोर्टर से पैसे मांगे तो उसने विजिलेंस में शिकायत दी थी। इसी के साथ इस खेल की पोल खुल गई।
अंबाला विजिलेंस ने इस मामले में केस दर्ज करते हुए दो दलालों सहित विभाग के कनिष्ठ कर्मचारी को गिरफ्तार किया था। इस गिरफ्तारी के बाद हुई जांच में तत्कालीन डीटीओ एवं कैथल के एसडीएम अमरिंद्र सिंह मनैस की संलिप्तता पाई गई। जिस पर मंगलवार को अमरिंद्र सिंह को विजिलेंस की अंबाला टीम ने कैथल से गिरफ्तार कर लिया। मंगलवार देर शाम डीसी कैथल कार्यालय को इस संबंध में सूचित किया गया था।
उधर, बुधवार को इस संबंध में शिकायतकर्ता देशराज ने कहा कि उसकी गाड़ी को नवंबर माह में रोका गया था। उस समय डीटीओ कार्यालय की टीम ने उसके ट्रक को छोड़ने के लिए 20 हजार रुपये मांगे थे। जिसे उसने उस समय दिए गए एक मोबाइल नंबर पर ऑनलाइन भेजा था। बाद में जिस व्यक्ति का यह मोबाइल था। उस व्यक्ति ने तीन ट्रकों के लिए प्रति ट्रक 6 हजार रुपये की राशि के हिसाब से 18 हजार रुपये दे दिए थे। इसके बाद दिसंबर माह के पहले सप्ताह में फिर से उससे रुपये मांगे गए। जिस पर उसने दो ट्रकों के लिए 12 हजार रुपये देने से पहले विजिलेंस को शिकायत दी और विजिलेंस ने केस दर्ज कर इस मामले में कार्रवाई की थी।
160 से ज्यादा गाड़ियों के नंबर मिले
शिकायतकर्ता ने बताया कि विजिलेंस की जांच में दलालों के पास से 160 से ज्यादा गाड़ियों के नंबर मिले हैं। जिस गाड़ी चालक से रिश्वत मिल जाती थी, उसे फ्रेश फ्रूट या किसी अन्य नाम का स्टीकर जारी कर देते थे। जिस गाड़ी पर यह स्टीकर लगा होता था, उस गाड़ी को विभाग की टीम नहीं रोकती थी। यह एक तरह से अवैध पास था। चाहे वह गाड़ी ओवर लोड ही क्यों न हो। इसी से नाराज होकर शिकायतकर्ता ने विजिलेंस में शिकायत दी थी।
ऐसे हुई थी गिरफ्तारी की कार्रवाई
विजिलेंस अंबाला की टीम मंगलवार को सुबह लघु सचिवालय में पहुंच गई थी। जहां टीम ने एसडीएम के पहुुंचने का इंतजार किया। एसडीएम अमरिंद्र सिंह मनैस तीन जनवरी के बाद मंगलवार 18 जनवरी को कार्यालय में पहुंचे थे। यहां से कुछ फाइलें निपटाने के बाद वे सेक्टर 19 में स्थित एचएसवीपी कार्यालय भी गए। इसके बाद बताया जा रहा है कि विजिलेंस टीम ने उन्हें काबू कर लिया।