कैथल। कैथल डिपो में बसों की कमी से यात्रियों को गंतव्य तक जाने के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बसों की कमी के कारण जिले के राजौंद व कलायत के कई गांवों में बसों का रात्रि ठहराव बंद हो गया है। बता दें कि कैथल डिपो में करीब 200 बसों की जरूरत है जबकि मौजूदा समय में 81 बसें ही लोगों को यात्रा की सुविधा मुहैया करा रही हैं।
रोडवेज के कैथल डिपो में बसों की कमी होने से कई रूटों पर जाने वाले यात्रियों को दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। इसमें राजौंद, कलायत के साथ-साथ उचाना, पिल्लूखेड़ा, नरवाना, सेरधा में बसों की रात्रि ठहराव सेवा पिछले एक साल से बंद पड़ी है। बस में रोजाना सफर करने वाले यात्री संदीप, राजेश, रामनिवास व राजा का कहना है कि बसें न चलने से लोगों को निजी वाहनों में सफर करना पड़ता है, वे अपनी मनमर्जी का किराया वसूलते हैं। घंटों इंतजार के बाद निजी वाहन मिलता है। इन ग्रामीण रूटों पर बस चलाई जाएं ताकि लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कैथल से शाम के समय सेरधा जाने वाली बस सेवा गांव शेरुखेड़ी, सौंगल, माजरा से होकर जाती थी। वहीं राजौंद जाने वाली बस में गांव प्योदा, हरसौला, सौंगल, माजरा व राजौंद के यात्री सफर करते थे। नरवाना जाने वाली बस कलायत, उझाना, बेलरखा से नरवाना रात्रि ठहराव करती रही है। उचाना जाने वाली बस सेवा बंद होने से गांव गुलियाणा, किठाना, थुआ, छात्तर, कुचराना व उचाना जाने वाले लोगों को परेशानी हो रही है। पिल्लूखेड़ा बस सेवा राजौंद वाया अलेवा से जाती थी। इन बसों के बंद होने से दैनिक काम व नौकरी पेशा वाले लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है।
लोकल रूटों पर भी सात बजे के बाद नहीं मिलती बसें
यात्रियों का कहना है कि कैथल से कुरुक्षेत्र, जींद, गुहला चीका सहित कई लोकल रूटों पर सात बजे के बाद बस नहीं मिलती हैं, लोकल रूटों पर जाने वाले यात्रियों ने भी बस चलाने की मांग की है। रोडवेज महाप्रबंधक अजय गर्ग ने बताया कि मुख्यालय को बसों की मांग भेजी हुई है। इस महीने के अंत तक बसें आने की संभावना है। 35 बसों के आ जाने के बाद रात्रि ठहराव सेवा शुरू कर दी जाएगी।