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Kaithal News: भौतिकवाद के दौर में अब कमजोर होती जा रहीं परंपराएं

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सावन का महीना भारतीय संस्कृति में विशेष स्थान रखता है, लेकिन अब भौतिकवाद के इस दौर में कई परंपराएं धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही हैं। अब लोग वैज्ञानिक दृष्टिकोण को ज्यादा महत्व देने लगे हैं, जिसके कारण धार्मिक परंपराओं की अहमियत कम हो रही है। आजकल की व्यस्त दिनचर्या के कारण लोग पारंपरिक उत्सवों और पूजा-पाठ को प्राथमिकता नहीं दे पाते। साथ ही, कोरोना महामारी के दौरान सार्वजनिक आयोजनों पर पाबंदी ने भी इन परंपराओं को कमजोर किया।
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पहले संयुक्त परिवारों में लोग एक साथ रहते थे, तो परंपराओं का पालन स्वाभाविक रूप से होता था। अब परिवारों के छोटे होने और समाज में व्यक्तिगत स्वतंत्रता बढ़ने के कारण पारंपरिक धार्मिक उत्सवों का महत्व कम हो गया है।
हालांकि, आज भी बहुत से लोग अपनी सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित रखने के लिए प्रयासरत हैं। डिजिटल माध्यमों के जरिये इन परंपराओं को पुनः जीवित रखने के प्रयास हो रहे हैं, जैसे ऑनलाइन पूजा विधियां, व्रतों के बारे में जानकारी और श्रद्धालुओं को जोड़ने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं।
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प्रस्तुति : वीना तनेजा, सीवन
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