संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। मॉडल गांव बालू व गांव सारन के बीच निर्माण सामग्री को लेकर विवादों में आई निर्माणाधीन सड़क सौंदर्यीकरण योजना में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस कार्य के लिए न तो पंचायती राज विभाग की तकनीकी विंग से कोई अनुमति ली गई और न ही अनुमानित बजट न तैयार किया गया।
इसकी पोल तब खुली जब पंचायती राज विभाग की तकनीकी विंग से जुड़े अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि संबंधित निर्माण को लेकर उनके द्वारा कोई अनुमति नहीं दी गई है। ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता के लिए सरकार द्वारा ई-टेंडरिंग प्रक्रिया को लागू किया गया है।
बावजूद इसके ऐसे कौन से कारण हैं, जिसके चलते पंचायत विभाग ने बगैर टेंडर के सड़क के दोनों तरफ ब्लॉक्स लगाने का कार्य शुरू किया। उन्होंने निर्माण कार्य में प्रयुक्त किए जा रहे ब्लॉक्स व अन्य सामग्री की जांच करवाने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि ब्लॉक्स बिछाने के लिए किसी प्रकार का लेवल नहीं किया गया। गौरतलब है कि गांव बालू की गादड़ा पट्टी में पंचायत विभाग द्वारा मार्गों को सुगम बनाने की आड़ में धांधली का मामला हाल में उजागर हुआ। बालू से गांव सारन तक जाने वाले मार्ग की फुटपाथ व बर्म को मजबूत बनाने की इस योजना में गड़बड़ी की पोल तब खुली जब निर्माण कच्ची मिट्टी की तरह जगह-जगह से धंस गया। एसडीएम देवेंद्र शर्मा ने कहा कि विकास योजना को लेकर संबंधित विभागों के अधिकारियों से रिपोर्ट ली जाएगी। किसी प्रकार की अनियमितता और गड़बड़ी नहीं होने दी जाएगी।