सीवन। रसोई की ज़रूरतों में शामिल टमाटर के दाम इन दिनों आम उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण बन गए हैं। कुछ ही दिनों पहले तक 10 रुपये प्रति किलो मिलने वाला टमाटर अब 50-60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। इसका सीधा असर आम घरों की थाली और बजट दोनों पर साफ दिखने लगा है।
महंगाई का आलम यह है कि कई घरों में टमाटर को सलाद से हटाया जा चुका है, वहीं सब्जियों, दालों और चटनी में भी टमाटर का उपयोग सीमित कर दिया गया है। रसोई की जान माने जाने वाले इस लाल सब्जी ने तड़के का स्वाद तो बिगाड़ा ही है, साथ ही ग्रहणियों को भी सजगता से खरीदारी करने पर मजबूर कर दिया है।
स्थानीय सब्जी विक्रेताओं गौरव अरोड़ा और बलवान ने बताया कि कुछ समय पहले तक स्थानीय क्षेत्रों से टमाटर की आपूर्ति हो रही थी, जिससे दाम नियंत्रित थे। लेकिन अब टमाटर मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश से आ रहे हैं, जहां हालिया भारी बारिश ने फसल को नुकसान पहुंचाया है। इसके चलते आपूर्ति कम हुई है और भाव अचानक बढ़ गए हैं।
विक्रेताओं का कहना है कि जब तक स्थानीय उत्पादन फिर से शुरू नहीं होता, तब तक कीमतों में गिरावट की संभावना कम है। इस बीच, उपभोक्ता विवश होकर टमाटर का इस्तेमाल कम कर रहे हैं ताकि घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। संवाद