संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। श्री गीता भवन मंदिर में इस्कॉन प्रचार समिति की श्रीमद्भागवत कथा मंगलवार को अपने दूसरे दिन भी जारी रही। कथा व्यास श्रीमन साक्षी गोपाल दास ने बताया कि इस सांसारिक भव बंधन से मुक्त होने के लिए केवल भगवान की भक्ति रूपी तपस्या करनी होगी।
उन्होंने कहा कि कलयुग में केवल भगवान के नाम से ही हम इस सांसारिक बंधन से मुक्ति पा सकते हैं। भगवान का नाम ही हमें माया के जाल से निकाल सकता है। उन्होंने कहा कि शुद्ध वैष्णव भक्तों का संघ मनुष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि जो असली साधु हैं, जो भगवान के सच्चे भक्त हैं और जिनकी कृपा से भगवान मिलते हैं, उनके लक्षण होते हैं कि उनकी जिभा सदैव भगवान के सुंदर नाम, रूप, गुण और लीलाओं के गुणगान में लगी रहती है।
मन पर नियंत्रण करना आसान कार्य नहीं है। अपने मन को वश में करना हवा को नियंत्रित करने से भी कठिन है। जो व्यक्ति ज्ञान के माध्यम से अपने मन को नियंत्रित करने का प्रयास करता है, उसे अर्जुन से प्रेरणा लेनी चाहिए।
जब कोई भक्त भगवान से अपनी भक्ति के बदले कुछ नहीं मांगता तो भगवान उस भक्त के ऋणी हो जाते हैं। लेकिन यदि वह भक्त अपनी भक्ति के बदले कुछ मांगता है, तो भगवान उसे वह देकर मुक्त कर देते हैं। जो व्यक्ति सच्चे अर्थों में भगवान का भजन करता है, उसके जीवन में कभी अभाव नहीं आता।
प्रेस सचिव भारत मदान ने बताया कि कथा के दौरान श्री मुख से निकले ठाकुर जी के मीठे-मीठे भजनों पर भक्तों ने नृत्य कर ठाकुर जी को रिझाने का प्रयास किया। यजमान शहर के वरिष्ठ एडवोकेट मनदीप सिंह एवं समिति के प्रधान दीपक अग्रवाल ने ज्योति प्रज्वलित की।
भागवत कथा का श्रवण करने के पश्चात भगवान श्री ठाकुर जी की आरती उतारी गई। कथा के समापन पर सभी भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। कथा स्थल पर इस्कॉन समिति के राज गुलाटी, राम निवास, आशीष गर्ग, नीरज गर्ग, अमित गर्ग, संजय वाही, संजीव शर्मा, मोनू गोयल, हरि दर्शन, विजय शर्मा, विनय तनेजा, पंकज शर्मा उपस्थित रहे।