संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिला परिषद की बैठक के दौरान उस समय माहौल गरमा गया जब पूर्व अध्यक्ष दीप जाखौली ने सदन में भ्रष्टाचार और भ्रष्ट पार्षदों का मुद्दा उठाया। उनकी बातों पर पार्षद दीप बालू ने आपत्ति जताते हुए उल्टे पूर्व अध्यक्ष पर ही उनके कार्यकाल में भ्रष्टाचार के आरोप जड़ दिए। इससे दोनों के बीच तीखी बहस हो गई। हालांकि, बैठक के बाद दोनों एक-दूसरे से गले मिलते हुए नजर आए, जिससे विवाद की स्थिति सामान्य हो गई।
बैठक में विवाद तब और गहरा गया जब वार्ड 11 के निलंबित पार्षद विक्रमजीत कश्यप को प्रथम पंक्ति में बैठाने और उन्हें अपने वार्ड की समस्या रखने की अनुमति दिए जाने पर कुछ सदस्यों ने आपत्ति जताई।
पूर्व अध्यक्ष दीप जाखौली ने बैठक में सवाल उठाते हुए कहा कि जो पार्षद भ्रष्टाचार के मामले में रंगे हाथों पकड़े गए, वे अगली पंक्ति में बैठे हैं जबकि अन्य ईमानदार पार्षदों को पीछे बैठने के लिए कहा गया।
एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने विक्रमजीत कश्यप को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। इस मामले में पार्षद प्रतिनिधि भारत हरसौला को भी आरोपी बनाया गया था। मामले के सामने आने के बाद विक्रमजीत को निलंबित कर दिया गया था।
एक पार्षद और एक पार्षद प्रतिनिधि पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, लेकिन मामला अभी अदालत में विचाराधीन है। जब तक कोर्ट का फैसला नहीं आता, हम किसी को दोषी नहीं मान सकते। सदन की कार्यवाही में उनकी बातों को शामिल नहीं किया गया
है। -कर्मबीर कौल, जिला परिषद अध्यक्ष