संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। कलायत में खेल स्टेडियम के अभाव ने नवोदित खिलाड़ियों और सेना-पुलिस में भर्ती की तैयारी करने वाले युवाओं के सामने बड़ी मुश्किल खड़ी कर दी है। दशकों से स्टेडियम की मांग कर रहे युवाओं को आज भी नहर की पटरी और सड़कों पर ही अभ्यास करना पड़ रहा है।
राघव राणा ने बताया कि हालात इतने खराब हो गए हैं कि बच्चों को खेलों की प्रैक्टिस से लेकर फिजिकल तैयारी तक खुले में नहर किनारे करनी पड़ती है। पिछले पांच वर्षों में यहीं अभ्यास करने वाले लगभग 15 से 20 युवा सेना में चयनित हुए हैं, जो उनकी मेहनत और मजबूरी दोनों को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि फरवरी में हुए नगरपालिका चुनाव में युवाओं ने स्पष्ट कहा था कि वे उसी प्रत्याशी को वोट देंगे जो स्टेडियम निर्माण का ठोस आश्वासन देगा। सभी ने वादा किया, लेकिन स्टेडियम आज तक नहीं बना।
निखिल राणा ने बताया कि स्टेडियम की मांग को लेकर युवा नगर पालिका सचिव से लेकर मंत्री तक कई बार ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। स्टेडियम न होने से उन्हें अभ्यास करने में काफी दिक्कतें होती हैं।
युवाओं ने कहा कि जब वे मांग लेकर अधिकारियों या नेताओं के पास जाते हैं, तो उनसे कहा जाता है कि कलायत में स्टेडियम के लिए जमीन नहीं है, आप स्थान बता दें, स्टेडियम बना दिया जाएगा। युवाओं ने सवाल उठाया कि बच्चों को अपनी तैयारी करनी है या प्रशासन को जमीन दिलवाने में समय लगाना है? यह जिम्मेदारी सरकार की है, न कि खिलाडिय़ों की।
उन्होंने कहा कि मजबूरी में बच्चों को खेल अभ्यास के लिए अन्य नगरों में जाना पड़ता है। राघव राणा ने बताया कि लड़कों की तरह लड़कियों के पास अभ्यास के लिए सुरक्षित स्थान भी नहीं है।
युवाओं ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि कलायत में जल्द से जल्द खेल स्टेडियम का निर्माण करवाया जाए, ताकि युवा गलत राह पर जाने की बजाय खेलों में अपना भविष्य संवार सकें।