कैथल। जिला उपभोक्ता फोरम आयोग ने ई-रिक्शा बीमा क्लेम से जुड़े मामले में फैसला सुनाया है। बीमा कंपनी की सेवा में कमी बताकर दोषी ठहराया है। आयोग ने बीमा कंपनी को 40,008 रुपये की शेष क्लेम राशि, 5 हजार रुपये मुआवजा और 5 हजार रुपये मुकदमा खर्च अदा करने के निर्देश दिए हैं।
आदेश का पालन 45 दिन के भीतर नहीं होने पर संबंधित राशि पर सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। बलविंद्र सिंह ने आयोग में दायर शिकायत में बताया कि उनकी ई-रिक्शा सड़क दुर्घटना में क्षतिग्रस्त हो गई थी। दुर्घटना के बाद वाहन की मरम्मत मोडलाइन व्हीकल्स प्राइवेट लिमिटेड और हरि ओम एंटरप्राइज से करवाई गई। मरम्मत पर कुल 66,012 रुपये खर्च हुए। शिकायतकर्ता ने यह राशि बीमा क्लेम के रूप में मांगी लेकिन बीमा कंपनी ने केवल 26,004 रुपये का ही भुगतान किया। बीमा कंपनी की ओर से दलील दी गई कि सर्वेयर पंकज शर्मा की रिपोर्ट के आधार पर नुकसान का आंकलन 27,423 रुपये किया गया था और उसी के अनुसार भुगतान कर दिया गया। वहीं आयोग ने स्पष्ट कहा कि सर्वेयर की रिपोर्ट अंतिम और बाध्यकारी नहीं मानी जा सकती। उन्होंने न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड व प्रदीप कुमार सहित कई फैसलों का हवाला दिया।
आयोग की अध्यक्ष नीलम कश्यप की पीठ ने माना कि शिकायतकर्ता ने वाहन की मरम्मत पर वास्तविक रूप से 66,012 रुपये खर्च किए थे और बीमा कंपनी की ओर से पूरी राशि का भुगतान नहीं करना सेवा में कमी है। आयोग ने दोनों विपक्षी पक्षों को संयुक्त रूप से शेष राशि और अन्य खर्च अदा करने के आदेश दिए हैं।