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Kaithal News: वास्तुकला का अद्वितीय उदाहरण है कलायत का ब्रिक टेंपल

Fri, 18 Jul 2025 12:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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निशीकांत शर्मा
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कलायत। कलायत और इसके आसपास का क्षेत्र कई प्राचीन और दुर्लभ मंदिरों की धरोहर संजोए हुए है। इन्हीं में से एक है — नगर के कपिल तीर्थ के किनारे स्थित भगवान शिव को समर्पित ब्रिक टेंपल। पंचरथ शैली में प्राचीन ईंटों से निर्मित यह शिवालय प्राचीन गुर्जर प्रतिहार काल की वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है। पुरातत्व विभाग ने इसे राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा दिया है।

सावन में बढ़ती है आस्था की गूंज ः पूरे वर्ष श्रद्धालु इस मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए आते हैं, लेकिन सावन मास में यहां विशेष भीड़ रहती है। स्थानीय शिव भक्तों के साथ जिले के श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर आस्था का केंद्र है तो पुरातत्व प्रेमियों के लिए ऐतिहासिक आकर्षण का स्थल।
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ईंटों से निर्मित एक दुर्लभ धरोहर

ईंटों से बना यह मंदिर प्राचीन भारतीय स्थापत्य का एक बेहतरीन उदाहरण है। इसके गर्भगृह में शिवलिंग स्थापित है। मंदिर के पिछले हिस्से में बनी सीढ़ियां एक प्राचीन कुंड तक जाती हैं, जिसे कभी स्नान के लिए प्रयोग में लाया जाता था। संवाद

मंदिर की पंचरथ शैली इसकी विशेष पहचान है — चौकोर आकार, एक अंतराल, एक बरामदा, और शिखर पर लघु चैत्य झरोखों की मनोहारी आकृतियाँ। इसके शिखर की संरचना मधुमक्खी के छत्ते जैसी प्रतीत होती है, जो इसे आसपास के अन्य मंदिरों से अलग बनाती है।

नक्काशीदार ईंटें, बिना गारे की कला ः इस मंदिर की ईंटों पर गारे के बिना बनाई गई फूलों और अन्य डिजाइनों की नक्काशी अद्भुत है। अजंता-एलोरा की तर्ज पर डिजाइन किए गए इस मंदिर में स्थापत्य की सौंदर्यता देखते ही बनती है।

कैसे पहुंच सकते हैं यहां पर

यह मंदिर कलायत बस स्टैंड से मात्र आधा किलोमीटर और रेलवे स्टेशन से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कैथल से 25 किलोमीटर और नरवाना से 18 किलोमीटर दूर इस स्थान तक बस, रेल या निजी वाहन से आसानी से पहुंचा जा सकता है।
कपिल मुनि, शालिवाहन राजा से जुड़ी मान्यता

यह स्थान केवल वास्तुशिल्प की दृष्टि से ही नहीं, धार्मिक दृष्टिकोण से भी विशिष्ट है। मान्यता है कि भगवान विष्णु के पांचवें अवतार कपिल मुनि ने यहीं पर अपनी माता देवहुति को सांख्य दर्शन का ज्ञान दिया था।
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एक अन्य अनुश्रुति के अनुसार, राजा शालिवाहन को इसी स्थान पर चर्म रोग से मुक्ति मिली थी। प्रसन्न होकर उन्होंने एक ही रात में पांच शिवालयों का निर्माण करवाया था। आज इनमें से केवल दो मंदिर संरक्षित हैं, बाकी खंडहर में बदल चुके हैं।
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