संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जींद रोड स्थित हैफेड के गोदाम में रखे गेहूं के स्टॉक पर पानी डाले जाने की आशंका पर जिला प्रशासन जांच कर रहा है। इस संबंध में कैथल के एसडीएम अजय कुमार ने गत मंगलवार की रात को हैफेड गोदाम का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान प्रशासनिक टीम ने मौके पर ही सात सैंपल लिए, जिनमें 12.6 प्रतिशत नमी पाई गई है।
प्रशासन का अनुमान है कि गोदाम में करीब 10 हजार से अधिक बैग भीग चुके हैं। हालांकि अब तक की जांच में यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि पानी किसने डाला और किस उद्देश्य से यह कार्य किया गया। साथ ही सरकार को नुकसान पहुंचाने की मंशा के किसी व्यक्ति की पहचान भी सामने नहीं आई है।
एसडीएम अजय कुमार ने जानकारी दी कि गेहूं भीगने की सूचना पर उन्होंने मार्केट कमेटी और खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की टीमों के साथ निरीक्षण किया। टीम ने जिन सात सैंपलों को लिया, उनमें सभी में 12.6 प्रतिशत नमी पाई गई है।
यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि करीब डेढ़ साल पहले भी इसी गोदाम में पानी डालने का मामला सामने आया था, लेकिन उस समय चंडीगढ़ मुख्यालय की टीम की जांच में विभाग को क्लीन चिट दे दी गई थी।
यह है पूरा मामला : मंगलवार देर रात एसडीएम अजय कुमार ने गोपनीय सूचना के आधार पर हैफेड गोदाम का निरीक्षण किया था। उन्हें सूचना मिली थी कि बारिश के बहाने कुछ गेहूं के चठ्ठों को खुला छोड़ दिया गया, जिससे जानबूझकर पानी पहुंचने की आशंका जताई गई। इसी के आधार पर मार्केट कमेटी कैथल और खाद्य आपूर्ति विभाग की टीम के साथ एसडीएम पहुंचे और सैंपल एकत्रित किए।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि कई जगहों पर नमी की स्थिति संदिग्ध थी। इस संबंध में हैफेड के जिला प्रबंधक को रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है, जो आज डीसी प्रीति को सौंपी जाएगी। इसके आधार पर जिला उपायुक्त अगला निर्णय लेंगी।
एसडीएम अजय कुमार ने बताया कि हमें सूचना मिली थी कि जींद रोड स्थित हैफेड के गोदाम में रखे गेहूं के स्टॉक पर पानी डाला गया है। औचक निरीक्षण में सात सैंपल लिए गए थे। इस संदर्भ में रिपोर्ट तैयार कर डीसी को सौंपी जाएगी।
नमी पर क्या हैं नियम
सरकारी मानकों के अनुसार अनाज मंडियों में आए गेहूं में 12 से 14 प्रतिशत तक नमी स्वीकार्य होती है। लेकिन खरीद के बाद भंडारण से पहले यह नमी घटाकर 11 से 12 प्रतिशत के बीच होनी चाहिए।
एसडीएम के निरीक्षण में नमी की मात्रा भले ही बेहद अधिक नहीं रही, लेकिन प्राकृतिक नमी से थोड़ी अधिक जरूर दर्ज की गई है। अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्लीन चिट देता है या जानबूझकर नुकसान पहुंचाने की मंशा के तहत कोई सख्त कार्रवाई की जाती है।