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Kaithal News: अस्थि विसर्जन घाट, महिला घाट और परिक्रमा मार्ग होंगे विकसित

Tue, 23 Jun 2026 12:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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जानकारी देते कपिल मुनि तीर्थ कमेटी प्रधान राजू कौशिक व मंदिर पुजारी संजय शास्त्री
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कलायत। कलायत स्थित पौराणिक श्री कपिल मुनि तीर्थ के सुंदरीकरण और रखरखाव के कार्य में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड (केडीबी) के सहयोग से श्री कपिल तीर्थ कमेटी ने कार्य प्रारंभ कर दिया है। हालांकि, विकास कार्यों को गति देने के लिए कमेटी को केडीबी के पूर्ण सहयोग और आगे की प्रक्रिया का इंतजार है।
श्री कपिल तीर्थ कमेटी के प्रधान राजू कौशिक ने बताया कि कलायत का श्री कपिल मुनि तीर्थ अत्यंत प्राचीन और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल है। मान्यता के अनुसार इसी स्थान पर भगवान विष्णु के पंचम अवतार कपिल मुनि ने सांख्य शास्त्र की रचना की थी। उन्होंने कहा कि लंबे समय से उचित देखरेख और रखरखाव के अभाव में तीर्थ की स्थिति काफी खराब हो गई थी।
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उन्होंने बताया कि तीर्थ के समीप लगभग 6 हजार वर्ष पूर्व राजा शालिवाहन द्वारा निर्मित शिव मंदिर स्थित है, जिसे ब्रिक टेंपल के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा संरक्षित राष्ट्रीय धरोहर घोषित है। इसी कारण इसके चारों ओर 100 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य पर प्रतिबंध है, जिससे तीर्थ के विकास कार्यों में बाधाएं आ रही थीं।
राजू कौशिक ने बताया कि अब प्रदेश सरकार और कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के प्रयासों से पुरातत्व विभाग से कपिल तीर्थ में विकास कार्यों की अनुमति प्राप्त हो गई है। इसके तहत तैयार की गई योजना में अस्थि विसर्जन घाट, महिला घाट, जल निकासी व्यवस्था, परिक्रमा मार्ग पर डस्टबिन और बैठने के लिए बेंच लगाने का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने बताया कि प्रारंभिक चरण में तीर्थ से रुके हुए पानी की निकासी का कार्य शुरू किया गया है। इसके बाद परिक्रमा मार्ग की दीवारों पर उगे पेड़ों को हटाकर मरम्मत कार्य किया जाएगा। पानी निकासी के बाद तल में जमा जंगली वनस्पति को भी साफ किया जाएगा।
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कपिल मुनि मंदिर के मुख्य पुजारी संजय शास्त्री ने कहा कि तीर्थ को स्वच्छ और पवित्र बनाए रखना हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग तीर्थ के खड़े पानी में हवन सामग्री, पॉलिथीन, टूटी मूर्तियां और अन्य कचरा डाल देते हैं, जिससे पानी दूषित होकर दुर्गंध फैलने लगती है।
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