सीवन। बाबा नारायण दास रंगमंच क्लब की ओर से वीरवार की रात आयोजित रामलीला मंचन में राम वनवास प्रसंग ने दर्शकों को भावविभोर कर उनकी आंखें नम कर दीं।
मंचन के दौरान राजा दशरथ की विवशता और श्री राम के प्रति उनका अगाध प्रेम कलाकारों द्वारा इस तरह से प्रस्तुत किया गया कि अनेक दर्शकों की आंखें भर आईं। श्री राम ने कहा, “पिता का वचन ही मेरे लिए धर्म है,” और इसी भाव से उन्होंने राजमहल का सुख-भोग त्याग कर वनगमन का निश्चय किया।
माता सीता ने पति धर्म निभाते हुए श्री राम संग वन जाने का आग्रह किया और लक्ष्मण ने भ्रातृप्रेम में साथ चलने का प्रण लिया। जब श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण ने अयोध्या छोड़ने का संकल्प लिया, तो पूरा पंडाल “जय श्रीराम” के नारों से गूंज उठा।
मंच पर राजा दशरथ की पीड़ा, कैकेई की जिद और श्री राम की धर्मनिष्ठा ने दर्शकों को गहराई से छुआ। कई दर्शक बार-बार तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साह बढ़ाते रहे। छठे दिन रामलीला में मुख्यातिथि के रूप में कमल शर्मा और कंवलदीप सैनी ने रिबन काटकर मंचन का शुभारंभ किया। रोजाना सैकड़ों श्रद्धालु इस रामलीला में शामिल होकर पौराणिक प्रसंगों का आनंद ले रहे हैं। राम का अपने पिता राजा दशरथ की आज्ञा को सर्वोपरि मानकर वनवास स्वीकार करना इस प्रसंग का मुख्य आकर्षण रहा।