घायल हाथ पर लगे टांके व पट्टी दिखाता डॉ. रामेश्वर फौजी। संवाद
कैथल। जिला नागरिक अस्पताल की इमरजेंसी में घायल होने वाले आम मरीजों को डॉक्टर के बजाय वार्ड ब्वॉय या हेल्पर से टांके लगवाए जा रहे हैं। करनाल रोड स्थित रणधीर कॉलोनी निवासी डॉ. रामेश्वर फौजी ने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पताल में आम मरीजों के घाव पर डॉक्टर के बजाय वार्ड ब्वॉय या हेल्पर से टांके लगवाए जा रहे हैं जबकि वीआईपी या प्रभावशाली मरीजों के मामले में डॉक्टर और सर्जन स्वयं टांके लगाते हैं।
उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। डॉ. रामेश्वर फौजी के अनुसार वह बेंच पर बैठे थे, इस दौरान उनके हाथ में कील लग गई और हाथ कट गया। उपचार के लिए वह जिला नागरिक अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे। उनका आरोप है कि वहां उनके हाथ पर वार्ड ब्वॉय ने टांके लगाए। उन्होंने जब वार्ड ब्वॉय से पूछा कि टांके लगाने का काम डॉक्टर का है, तो कथित तौर पर जवाब दिया गया कि डॉक्टर केवल वीआईपी या खास लोगों को ही टांके लगाते हैं, जबकि आम मरीजों को वार्ड ब्वॉय ही टांके लगाते आ रहे हैं। डॉ. फौजी ने कहा कि वार्ड ब्वॉय के लगाए गए टांके के बाद उन्हें दर्द रहने लगा और उन्हें दोबारा निजी अस्पताल में जाकर इलाज लेना पड़ा।
इलाज में भेदभाव नहीं होना चाहिए : डॉ. रामेश्वर
डॉ. रामेश्वर फौजी का कहना है कि अस्पताल में आने वाले प्रत्येक मरीज को समान और सुरक्षित उपचार मिलना चाहिए। मरीज आम हो या वीआईपी, उपचार की गुणवत्ता में किसी प्रकार का अंतर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि अस्पताल में डॉक्टरों की कमी है तो सरकार को उसे दूर करना चाहिए लेकिन स्टाफ की कमी का असर मरीजों की सुरक्षा और उपचार पर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने मामले की जांच करवाकर लापरवाही मिलने पर जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
वार्ड ब्वॉय टांके नहीं लगा सकता : सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ. रेणु चावला ने कहा कि वार्ड ब्वॉय या अटेंडेंट को टांके लगाने की अनुमति नहीं है। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों की कमी की स्थिति में प्रशिक्षित ऑपरेशन थियेटर असिस्टेंट या स्टाफ नर्स की ओर से टांके लगाए जा सकते हैं, जबकि गंभीर मामलों में डॉक्टर स्वयं उपचार करते हैं। उनके संज्ञान में इस तरह का कोई मामला अभी तक नहीं आया है, फिर भी वे इसकी जांच करवाएंगी और लापरवाही मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई भी की जाएगी।