कैथल। जवाहर पार्क स्थित बाबा शाह कमाल की दरगाह पर तीन दिवसीय उर्स मेले के दूसरे दिन देश के जाने-माने कव्वाल हमसर हयात बाबा शाह कमाल की दरगाह पर पहुंचे और उन्होंने दरगाह पर माथा टेककर सबकी सुख-समृद्धि की दुआ की। उन्होंने अपनी कव्वालियों के माध्यम से यह संदेश दिया कि सभी इंसान एक समान हैं और पैगंबर, सूफी, संत तथा पीर-फकीर सब धर्मों के साझे प्रतीक होते हैं। उन्होंने कहा कि ईश्वर ने सभी धर्मों, जातियों और मजहबों को समान रूप से बनाया है, इसलिए हम सबको प्रेम और सौहार्द के साथ मिलकर रहना चाहिए।
कव्वाल हमसर हयात निजामी ने बाबा रजनीश शाह की उपस्थिति में बाबा शाह कमाल की शान में विभिन्न कव्वालियां गाईं और उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी सूफी गायकी ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। इस उर्स मेले में देश विदेश से हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं और बाबा की दरगाह पर चादरें चढ़ाकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। दरगाह पर तीन दिनों तक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया है, जिसमें हजारों श्रद्धालु प्रेम और श्रद्धा के साथ प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। बाबा की दरगाह पर आयोजित इस उर्स मेले ने एक बार फिर सभी धर्मों और समुदायों के बीच आपसी भाईचारे और प्रेम का संदेश दिया है।
अनेकता में एकता के सूत्र को पिरोए भारत विश्व का एकमात्र ऐसा देश है जिसमें अनेक धर्मों, वर्गों तथा समुदायों के लोग अति प्राचीन काल से साथ-साथ रहते आए हैं। समय की करवट के साथ ही अनेक पैगंबर, सूफी, संत तथा पीर-फकीर इस पावन भूमि में अवतरित हुए हैं, जिन्होंने कौमी एकता और सौहार्द बनाए रखने के लिए अनेक कलामों, कविताओं, दोहों, छंदों तथा वाणियों के माध्यम से जनमानस को एक सूत्र में बांधने की मिसाल कायम की है। जवाहर पार्क में स्थित बाबा शाह कमाल लाल दयाल की दरगाह हिंदू-मुस्लिम एकता की एक जीती-जागती मिसाल है। हर वीरवार को यहां भक्तों का हजूम उमड़ पड़ता है और लोग बड़ी आस्था तथा श्रद्धा के साथ बाबा की दरगाह पर अपना मत्था टेकते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए मन्नतें मांगते हैं। यहां आने वाले असंख्य भक्तों का दृढ़ विश्वास है कि बाबा की मजार पर सच्चे दिल से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। और बाबा शाह कमाल का नाम भी सभी धर्मों के लोगों में बड़ी श्रद्धा तथा भक्तिभाव से लिया जाता है।