कैथल। कहते हैं मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती, और यह करिश्मा कर दिखाया है तीन बहनों और एक भाई की तीसरी बहन निशा ने। निशा ने अपने निर्धन परिवार में खुशियां लेकर आई हैं। नवरात्र के पहले दिन बेटी निशा ने अपने माता-पिता और भाई-बहनों को एक खास तोहफा दिया।
निशा का इंडियन नेवी में अग्निवीर योजना के तहत आठ नवंबर को चयन हुआ था। उनकी चार महीने की ट्रेनिंग ओडिशा के चिल्का में पूरी हुई। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद रविवार को जब निशा कैथल के चंदाना गेट स्थित शिव नगर में अपने घर पहुंची, तो ढोल-नगाड़ों और फूलमालाओं के साथ उनका भव्य स्वागत किया गया।
जैसे ही निशा ने घर की दहलीज पर कदम रखा, उन्होंने अपने पिता रणधीर सिंह जांगड़ा के सिर पर अपनी नेवी की टोपी पहनाई, तो पिता खुशी और गर्व से फफक कर रो पड़े। माता बबली ने बेटी का तिलक कर मिठाई खिलाई और खुशी से गले लगा लिया। भाई-बहनों और रिश्तेदारों ने भी निशा को कंधे पर उठाकर उत्साह जताया।
संघर्ष और सफलता की कहानी
चयनित निशा ने बताया कि उन्होंने आठ नवंबर को इंडियन नेवी में मेकेनिकल इंजीनियरिंग के पद पर ज्वाइन किया। इसके बाद चार महीने की ट्रेनिंग और फिर 15 दिनों की शिप पर ट्रेनिंग पूरी करने के बाद वह घर लौटी हैं। उन्होंने कहा कि इस सफलता के पीछे उनके माता-पिता और भाई-बहनों का पूरा सहयोग रहा।
निशा चार बहनों में तीसरे नंबर पर हैं। उनकी बड़ी बहन आरजू बीएससी कंप्यूटर साइंस की शिक्षा के लिए लंदन गई हुई हैं, जबकि दूसरी बहन साक्षी चंडीगढ़ में होटल मैनेजमेंट का कोर्स कर रही हैं। उनका छोटा भाई वंश आरकेएसडी कॉलेज में बीकॉम प्रथम वर्ष का छात्र है और सबसे छोटी बहन दिव्या 12वीं कक्षा में पढ़ रही है। पिता रणधीर सिंह एक कार पेंटर हैं और माता बबली गृहिणी हैं।
कोचिंग के बिना हासिल की सफलता
निशा ने आरकेएसडी कॉलेज से बीएससी कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएशन किया और इसके साथ ही विभिन्न परीक्षाओं की तैयारी करती रहीं। उन्होंने बिना किसी कोचिंग के ही अपनी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया। पहली बार सफलता न मिलने पर उन्होंने हार नहीं मानी और कड़ी मेहनत से दोबारा परीक्षा दी। दूसरी बार उन्होंने लिखित परीक्षा, फिजिकल टेस्ट और मेडिकल क्लियर करके इंडियन नेवी में जगह बनाई।
गुरुद्वारे में मिला सफलता का समाचार
जब उनका चयन हुआ, तब वह पंजाब में एक अन्य परीक्षा के लिए गई हुई थीं। रिजल्ट की खबर भटिंडा के गुरुद्वारे में मिली, जहां उन्होंने सबसे पहले अपने पिता को फोन कर कहा, पापा, मैं फौज में जा रही हूं। यह सुनकर उनके पिता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
निशा ने कहा, मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती। यदि मन में कुछ करने का जज्बा हो, तो कुछ भी असंभव नहीं है। माता-पिता ने भी अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि आज नवरात्र के पहले दिन माता रानी ने उनकी झोली खुशियों से भर दी है। उन्होंने सभी माता-पिता से अपील की कि वे अपने बच्चों को हर कदम पर सपोर्ट करें, ताकि वे जीवन में कामयाबी हासिल कर सकें।