यूजीसी व सरकार के बीच लंबे समय से चली आ रही तनातनी खत्म हो गई है। कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी ने मंगलवार को अधिसूचना जारी करते हुए अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों की परीक्षा लेने का फैसला लिया है। पूरे प्रदेश में अब लगभग सवा लाख विद्यार्थी यूजी व पीजी की परीक्षा देंगे। वहीं कोरोना महामारी को देखते हुए विद्यार्थियों ने इस फैसले का विरोध किया है। विद्यार्थी बोले कि पांच सेमेस्टरों की परीक्षा विद्यार्थियों द्वारा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई है, उन्हीं के आधार पर बच्चों को अगली कक्षा में प्रोमोट किया जाए या फिर तीस प्रतिशत ही बच्चों को पढ़ाया गया है, उसी आधार पर परीक्षा ली जाए।
बता दें कि विवि द्वारा यूजी अंतिम वर्ष परीक्षाएं दस सितंबर से कराने का फैसला लिया है, जबकि पीजी की परीक्षाएं 15 सितंबर से आयोजित होगी। विद्यार्थी घर बैठे ही परीक्षा देंगे। विवि द्वारा संबंधित कॉलेज व यूनिवर्सिटी में परीक्षा के दिन प्रश्न पत्र सुबह दस बजे तक विद्यार्थियों की ईमेल पर अपलोड किए जाएंगे। विद्यार्थियों को नियमित प्रश्नों की बजाय आधे प्रश्नों के ही उत्तर देने होंगे और उसके अनुरूप ही परीक्षा का समय भी कम कर दिया है।
विद्यार्थियों की राय
अंतिम वर्ष की परीक्षा की तिथि जारी करने के बाद परीक्षार्थियों ने नए सिस्टम से आयोजित होने वाली परीक्षाओं का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि दूर-दराज से ग्रामीण क्षेत्र में अधिकतर बच्चों के पास स्मार्टफोन व इंटरनेट की सुविधा नहीं है। बच्चे कैसे इस प्रणाली से जुड़ पाएंगे। वहीं बच्चों को तकनीकी जानकारियों का भी अभाव है।
शोधार्थी विशाल शर्मा का कहना है कि सरकार व यूनिवर्सिटी द्वारा कोरोना काल में अंतिम वर्ष की परीक्षा आयोजित करवाने का फैसला सही नहीं है। दूसरे राज्य से भी शिक्षण संस्थानों में बच्चे पढ़ते हैं, वे कैसे शिक्षण संस्थानों के लिंक से जुड़ेंगे।
विद्यार्थी दीपक कुमार ने कहा कि यूनिवर्सिटी द्वारा अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को भी प्रमोट किया जाना चाहिए। परीक्षा आयोजित होने से बच्चों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। कोरोना महामारी के दौर में विद्यार्थी सही से परीक्षा की तैयारी नहीं कर पाए है।
विद्यार्थी विकास आशरी का कहना है कि उपकरणों के अभाव में विद्यार्थी शिक्षण संस्थानों में आएंगे। वहां पर न तो सैनिटाइजर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होंगे और न ही सोशल डिस्टेंस मेनटेंन होगा। इसीलिए फिलहाल परीक्षा आयोजित करना सही फैसला नहीं है।
विद्यार्थी लवेश का कहना है कि अधिकतर बच्चों के पास स्मार्टफोन उपलब्ध नहीं है। साथ ही इंटरनेट की भी सुविधा नहीं है। जिससे वे ऑनलाइन यूनिवर्सिटी वेबसाइट या फिर कॉलेज के ऑफिशियल लिंक से जुड़ने में सक्षम नहीं होंगे। विद्यार्थियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी।
विवि की गाइडलाइन के आधार पर करवाई जाएंगी परीक्षा
राजकीय कॉलेज के प्रिसिंपल डा. ऋषिपाल बेदी ने बताया कि बच्चों को प्रश्न हल करने के लिए एक घंटा तीस मिनट का समय दिया जाएगा। इसके बाद रिकॉर्ड यूनिवर्सिटी में भेजें जाएंगे। उन्होंने बताया कि हायर एजुकेशन की गाइड लाइन के आधार पर ही परीक्षा आयोजित करवाई जाएगी।