अपनों की भाषा सपनों की भाषा हिंदी को लेकर अध्यापिकाओं ने अपने अपने तर्क दिए। उनका कहना है कि वर्तमान समय में कक्षा सातवीं व आठवीं के विद्यार्थियों को हिंदी की मात्राओं का ज्ञान नहीं होता है। हिंदी भाषा विश्व में बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। हिंदी भाषा को जैसे बोली जाती है वैसे लिखी जाता है। हिंदी भाषा के लेखन व उच्चारण में स्पष्टता होती है। हिंदी भाषा सरल व लचीली और व्यवहारिक भाषा है।
अध्यापिका रीतू का कहना है कि हिंदी भाषा हमारी राष्ट्र भाषा है। बच्चों को सबसे पहले हिंदी का मात्राओं का ज्ञान होना बहुत जरूरी है। वर्तमान समय में कक्षा सातवीं व आठवीं के विद्यार्थियों को इसका ज्ञान न होने के कारण भविष्य में कोई भी काम करते समय काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
अध्यापिका मुन्नी देवी ने बताया कि हिंदी भाषा विश्व में बोली जाने वाली भाषाओं मे से एक है। दूसरे देशों के लोग भी हिंदी भाषा सीखना चाहता है। हिंदी भाषा आम जनता से जुड़ी भाषा है। हिंदी भाषा को विचारों के आदान प्रदान के लिए सशक्त माध्यम माना गया है।
अध्यापिका रचना देवी का कहना है कि हिंदी भाषा को बच्चे आगे जाकर अच्छे से समझे। बैंक व अन्य प्राइवेट सेक्टरों में वर्तमान में भी अंग्रजी भाष का प्रयोग किया जाता है। लेकिन हिंदी भाषा को जैसे बोली जाती है वैसे लिखी जाता है। हिंदी भाषा में अपनी भावनाए को सही तरीके से प्रकट कर सकते हैैै।
अध्यापिका सुनीता ने कहा कि हिंदी भाषा का उद्भव संस्कृत भाषा से हुआ है। हिंदी का शब्दकोष दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। लेखन व उच्चारण में स्पष्टता होती है। हिंदी सरल, लचीली और व्यवहारिक भाषा है। आधुनिक समय में हिंदी ने विश्व स्तर पर एक अलग पहचान विकसित की है।