कैथल। तीन माह पहले टोक्यो पैरालंपिक में आर्चरी में भारत की ओर से प्रतिनिधित्व करते हुए कांस्य पदक जीतने वाले हविंद्र सिंह अब वर्ल्ड चैंपियनशिप में अपना जलवा दिखाएंगे। वर्ल्ड चैंपियनशिप 19 से 27 फरवरी तक होगी। हरविंद्र का मुख्य लक्ष्य पैरा एशियन गेम्स में भाग लेकर स्वर्ण पदक लाना है। इसके लिए वह निरंतर अभ्यास कर रहे हैं।
जिला कैथल के गुहला कस्बे के अजीत नगर गांव निवासी हरविंद्र के तीन माह पहले टोक्यो पैरालंपिक में कांस्य पदक जीतने के बाद युवाओं में काफी उत्साह बढ़ा। उनसे प्रेरणा लेकर जिले भर से सैकड़ों युवा विभिन्न खेलों से जुड़े। इस प्रतियोगिता में हरविंदर सिंह ने कांस्य पदक के लिए हुए शूटआउट में कोरिया के तीरंदाज को हराया था। इस जीत के बाद हरविंद्र सिंह पैरालंपिक में पदक जीतने वाले पहले भारतीय तीरंदाज बने।
हरविंद्र सिंह ने बताया कि अब उनका वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए चयन हुआ है। एक सप्ताह पहले इसके लिए सोनीपत में ट्रायल हुए थे। यह प्रतियोगिता 19 से 27 फरवरी को दुबई में आयोजित होगी। इसके बाद एशिया कप 21 से 26 मार्च तक थाईलैंड के बैंकॉक में होगा। इसके बाद इस बार पैरा एशियन गेम्स चीन में आयोजित होंगे। उनका लक्ष्य पैरा एशियन गेम्स में भाग लेकर स्वर्ण पदक लाना है। इसके लिए वह निरंतर अभ्यास कर रहे हैं। संवाद
लक्ष्य को पूरा करने के लिए निरंतर प्रयास करें युवा
हरविंद्र का कहना है कि युवा एक लक्ष्य निर्धारित करके उसे पूरा करने के लिए निरंतर मेहनत करें। लक्ष्य हासिल करने के लिए अच्छी दिनचर्या बनाएं और उसमें 100 प्रतिशत योगदान दें। इससे उन्हें एक न एक दिन मंजिल जरूर मिलेगी। यदि युवा समय रहते मेहनत कर लेते हैं तो उनकी मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती।
गलत इंजेक्शन लगने से रुक गया था एक टांग का विकास
हरविंद्र सिंह एक किसान परिवार से संबंध रखते हैं। उनके पिता परमजीत सिंह खेती बाड़ी से घर का गुजारा करते हैं। डेढ़ साल की आयु में गलत इंजेक्शन लगने से हरविंद्र की एक टांग का विकास रुक गया था। 2010 में बीए करने के लिए पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला में दाखिला लिया। वहां हरविंद्र कभी-कभी तीरंदाजी देखने के लिए मैदान पर चले जाते थे।
टीवी पर मैच देखने के बाद मिली तीरंदाजी करने की प्रेरणा
साल 2012 के लंदन ओलंपिक में तीरंदाजी का मैच टीवी पर देखा और वहां से तीरंदाजी करने की प्रेरणा मिली। कुछ दिन बाद मैदान पर जाकर कोच से तीरंदाजी का प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया। लगातार चार साल अभ्यास करने के बाद भी उसका चयन भारतीय टीम में नहीं हुआ था। चयन न होने से दुखी होकर उसने खेल छोड़ने का मन बना लिया था। उसके बाद उन्हें कोच जीवनजोत ने तीरंदाजी न छोड़ने की सलाह दी। कोच की प्रेरणा से नए तरीके से खेल की शुरुआत की और पहले ही साल में नेशनल प्रतियोगिता में मेडल हासिल किया।
ये हैं हरविंद्र की उपलब्धियां
हरविद्र सिंह देश के पहले तीरंदाज हैं, जिन्होंने 2018 में इंडोनेशिया में हुई एशियन पैरा गेम्स में भारत के लिए रिकर्व इवेंट में स्वर्ण पदक हासिल किया था। वह छह बार देश का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। एशियन पैरा चैंपियनशिप 2019 में कांस्य पदक हासिल किया था। जून 2019 में नीदरलैंड में आयोजित विश्व पैरा आर्चरी चैंपियनशिप में पैरालंपिक 2020 के लिए कोटा हासिल किया था। इसके अलावा बीजिंग में 2017 में हुई विश्व पैरा आर्चरी में सातवां स्थान। थाईलैंड में 2019 में हुई तीसरी एशियन पैरा आर्चरी के टीम इवेंट में कांस्य पदक। रोहतक में 2016 में हुई पहली पैरा आर्चरी नेशनल प्रतियोगिता में कांस्य पदक, तेलंगाना में 2017 में दूसरी पैरा आर्चरी नेशनल प्रतियोगिता में रजत पदक, रोहतक में 2019 में तीसरी पैरा आर्चरी नेशनल प्रतियोगिता रजत पदक हासिल किया था। वर्ष 2021 में टोक्यो पैरालंपिक में कांस्य पदक हासिल किया है।