संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। सरकार ने शिक्षा को डिजिटल लर्निंग से जोड़ने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर स्कूलों में डिजिटल बोर्ड लगाए, ताकि विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से सीखने का मौका मिल सके। लेकिन अब यही तकनीक कई जगह ठप पड़ गई है। जिले के करीब 400 स्कूलों में लगाए गए 980 डिजिटल बोर्डों में से लगभग 20 से 25 बोर्ड खराब होकर बंद पड़े हैं।
इनमें से कई बोर्डों के यूपीएस, मदर बोर्ड और ऑन-ऑफ बटन खराब हो चुके हैं। तकनीकी खामियों के चलते शिक्षकों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ रही है और छात्रों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
समाप्त हो गया अनुबंध, मरम्मत पर बढ़ेगा खर्च ः इन बोर्डों की देखरेख का काम जिस निजी एजेंसी को दिया गया था, उसका तीन साल का अनुबंध समाप्त हो चुका है। अब विभाग को अपने खर्च पर ही मरम्मत करवानी होगी। एजेंसी के विशेषज्ञ एक विजिट के लगभग तीन हजार रुपये लेते हैं। साथ ही, वे यह शर्त रखते हैं कि अगर दोबारा खराबी आती है तो नई विजिट के लिए अलग से शुल्क देना होगा।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इन बोर्डों की मरम्मत का खर्च भारी पड़ सकता है। फिलहाल विभाग की ओर से ठीक कराने की योजना बनाई जा रही है, लेकिन प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है।
जिले में 980 डिजिटल बोर्ड, 20 में आई खामी
जिला गणित विशेषज्ञ छत्रपाल ने बताया कि जिले के स्कूलों में कुल 980 डिजिटल बोर्ड उपलब्ध हैं। इनमें से करीब 20 बोर्डों में इलेक्ट्रॉनिक खराबी आई है। सभी की पहचान कर मरम्मत के लिए रिपोर्ट तैयार की जा रही है। जल्द ही उन्हें दुरुस्त कराया जाएगा।
शिक्षकों को नहीं दिया गया प्रशिक्षण
जब डिजिटल बोर्ड लगाए गए थे, तब शिक्षकों को इनके संचालन का प्रशिक्षण नहीं दिया गया। ऐसे में कई शिक्षक बोर्ड के तकनीकी हिस्सों को समझ नहीं पाए। कुछ ने स्वयं चलाने की कोशिश की, मगर बार-बार तकनीकी दिक्कत आने लगी। शिक्षकों का कहना है कि विभाग चाहे तो इनकी देखरेख के लिए जेई (जूनियर इंजीनियर) की ड्यूटी लगा सकता है, क्योंकि वे तकनीकी मामलों को बेहतर समझते हैं। वर्तमान में कई बोर्डों के यूपीएस और कंट्रोल सिस्टम बिल्कुल जवाब दे चुके हैं।