संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। देबन वाली गामड़ी गांव की रहने वाली 20 वर्षीय सिमरन कायरन ने जूडो खेल में शानदार प्रदर्शन कर जिले और प्रदेश का नाम रोशन किया है। साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली सिमरन आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी हैं। कड़ी मेहनत, अनुशासन और परिवार के सहयोग के दम पर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है।
सिमरन का सफर आसान नहीं रहा। एक छोटे से गांव से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के लिए उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। शुरुआत में जब उन्होंने जूडो खेलना शुरू किया तो गांव के कई लोगों ने ताने भी दिए। कुछ लोग कहते थे कि लड़कियों के लिए ऐसे खेल नहीं होते और खेलों में कॅरिअर
बनाना मुश्किल है। यहां तक कि रिश्तेदारों ने भी उन्हें रोकने और शादी कर खेल छोड़ने का दबाव बनाया।
लेकिन सिमरन ने इन सब बातों को नजरअंदाज करते हुए अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखा। उनके माता-पिता ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने हर संभव सहयोग दिया, जिससे वह लगातार अभ्यास कर सकीं। सिमरन के पिता सतबीर एक किसान हैं, लेकिन उन्होंने कभी संसाधनों की कमी को बेटी के सपनों के आड़े नहीं आने दिया।
सिमरन की उपलब्धियां
कड़ी मेहनत का ही परिणाम है कि सिमरन ने कई प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर कैथल जिले का नाम रोशन किया है।
n सीनियर रैंकिंग जूडो नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता।
n सीनियर नेशनल जूडो चैंपियनशिप में कांस्य पदक हासिल किया।
n हांगकांग में आयोजित एशियन कप जूडो प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता।
n कोरिया में आयोजित सीनियर एशियन कुराश चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
ताने देने वालों को आज सिमरन पर गर्व
कड़ी मेहनत, अनुशासन और परिवार के समर्थन ने सिमरन को आगे बढ़ने की ताकत दी। आज वही लोग उनकी सफलता पर गर्व महसूस करते हैं। सिमरन की कहानी यह साबित करती है कि अगर हौसला मजबूत हो और परिवार का साथ मिले तो किसी भी मुश्किल को पार किया जा सकता है।
उनके कोच जोगिंदर जगलान का कहना है कि सिमरन बेहद मेहनती और अनुशासित खिलाड़ी हैं। अगर वह इसी तरह मेहनत करती रहीं तो आने वाले समय में देश के लिए और भी बड़े पदक जीत सकती हैं। उन्होंने कहा कि सिमरन में जूडो के प्रति गहरा जुनून है और वह समय की भी पाबंद हैं।
देबन गांव और पूरे कैथल जिले के लोगों को सिमरन पर गर्व है। सिमरन ने यह साबित कर दिया है कि अगर लगन और मेहनत हो तो छोटे गांव से निकलकर भी बड़े मुकाम हासिल किए जा सकते हैं।